हनुमान जी को कलयुग का जागृत देवता माना जाता है. मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ उनकी आराधना करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और साहस, शक्ति व आत्मविश्वास का वरदान मिलता है. ज्योतिषाचार्य शैलेंद्र पांडेय के अनुसार, यदि पूजा पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ की जाए तो उसका प्रभाव और भी अधिक होता है. ज्येष्ठ माह के आखिरी बड़े मंगल के अवसर पर जानते हैं कि आखिर संध्या या रात्रि के समय हनुमान जी की पूजा विशेष फलदायी क्यों मानी जाती है.
रात में क्यों की जाती है हनुमान जी की पूजा?
आमतौर पर मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है. लेकिन शैलेंद्र पांडेय के अनुसार, यदि संभव हो तो संध्या या रात्रि के समय उनकी उपासना करना अधिक फलदायी माना गया है. मान्यता है कि संध्या काल में भगवान शिव समस्त सृष्टि का भ्रमण करते हैं. चूंकि हनुमान जी को भगवान शिव का रुद्रावतार माना जाता है, इसलिए इस समय उनकी पूजा का महत्व और बढ़ जाता है.
ऐसी भी मान्यता है कि दिनभर हनुमान जी प्रभु श्रीराम की सेवा में लगे रहते हैं. इसलिए संध्या और रात्रि का समय उनकी आराधना के लिए विशेष माना गया है. इस समय हनुमान चालीसा का पाठ करना भी अधिक प्रभावशाली बताया गया है.
हनुमान जी की पूजा कैसे करें?
हनुमान जी की पूजा करने से पहले तन और मन की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए. पूजा के समय लाल रंग का आसन बिछाकर बैठना शुभ माना गया है. साधक को अपने विचार, वाणी और व्यवहार में संयम रखना चाहिए और यथासंभव सात्विक जीवनशैली अपनानी चाहिए.
पूजा स्थल पर भगवान श्रीराम और हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. सबसे पहले भगवान श्रीराम का पूजन करें, क्योंकि हनुमान जी स्वयं प्रभु श्रीराम के परम भक्त हैं. इसके बाद घी का दीपक जलाकर फल, पुष्प और मिष्ठान अर्पित करें. हनुमान चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती के बाद अपनी मनोकामना व्यक्त करें.

More Stories
10 अगस्त 2026 का राशिफल: मेष से मीन तक जानें आज किसकी चमकेगी किस्मत
9 अगस्त 2026 राशिफल: 12 राशियों का हाल, किसकी चमकेगी किस्मत और कौन रहे सतर्क
सपने में दिखें ये 5 संकेत तो समझें जल्द चमक सकती है किस्मत