नई दिल्ली
दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर बड़े पैमाने पर कैश मिलने की खबरों के बीच उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को मीटिंग की। इस मीटिंग में जेपी नड्डा, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई राजनीतिक दलों के नेता मौजूद थे। बैठक में खुलकर कहा गया कि जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है। न्यायिक जवाबदेही तय होनी चाहिए, लेकिन न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर भी कोई असर न पड़े। बैठक में मौजूद खरगे समेत ज्यादातर नेताओं ने कहा कि जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और उनके व्यवहार को लेकर भी आचार संहिता तय हो और सख्ती से उसे लागू भी किया जाए।
राज्यसभा चेयरमैन जगदीप धनखड़ ने मल्लिकार्जुन खरगे की सलाह पर यह मीटिंग बुलाई थी। इस बैठक में पहुंचे ज्यादातर नेताओं की राय थी कि जजों की नियुक्ति में उचित पारदर्शिता नहीं है और रिश्वत लिए जाने के मामले भी आ रहे हैं। फिर भी जो बदलाव किया जाए, उससे न्यायपालिका की स्वायत्तता और स्वतंत्रता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। हालांकि न्यायिक जवाबदेही भी तय करने की जरूरत है। इस बीच कई नेताओं ने कहा कि हमें उस तीन सदस्यीय पैनल की जांच का इंतजार करना चाहिए, जिसे शीर्ष न्यायपालिका ने गठित किया है।
चर्चा के दौरान कॉलेजियम सिस्टम की खामियों पर भी बात हुई, जिसमें जज ही जजों के नामों की सिफारिश करते हैं और उन दिए हुए नामों में से ही किसी एक पर सरकार को मुहर लगानी होती है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के सांसदों ने इस दौरान न्यायिक नियुक्ति आयोग के गठन का भी सुझाव दिया। केंद्र सरकार इस आयोग के गठन का बिल 2014 में ही लेकर आई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। तब से ही यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच मतभेद का कारण रहा है। अब जस्टिस यशवंत वर्मा वाले मामले से यह मामला फिर से उभऱा है। कांग्रेस सांसदों ने यह मांग भी है कि जस्टिस यशवंत वर्मा प्रकरण पर लोकसभा में चर्चा की जानी चाहिए।

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