नागपुर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा है कि जिस तरह से दुनिया इस समय डावांडोल हो रही है, वैश्विक उथल-पुथल मची है, ऐसे में सुदृढ़ एवं सबल भारत ही विश्व का आधार बन सकता है। इसके लिए भारत को सभी समाजों को साथ लेकर चलना होगा और आदिवासी और अनुसूचित जाति समुदायों ने भारत की आत्मा बचाई है. इन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है.
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि विदेशी आक्रमणों और तमाम कठिनाइयों के बावजूद आदिवासी समुदायों और अनुसूचित जातियों ने भारत की पहचान और उसकी आत्मा को संरक्षित रखा.
संघ प्रमुख भागवत आज मुंबई के गेट वे ऑफ इंडिया पर आयोजित ‘कर्मयोगी एकल शिक्षक मेला’ में वनवासी इलाकों में शिक्षा का प्रसार करने वाले शिक्षकों को सम्मानित करने के अवसर पर बोल रहे थे। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अस्थिर विश्व में सुदृढ़ भारत ही आधार बन सकता है, जिसके लिए आदिवासी समाज को मुख्यधारा में लाना आवश्यक है।
भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को वापस देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने आगे कहा कि भारतीय समाज की मूल भावना और मूल्य प्रणाली हजारों वर्षों से कायम है, जिसे अक्सर हिंदू समाज की पहचान के रूप में देखा जाता है.
विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत की असली ताकत उसकी सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को निशाना बनाया जो इन मूल्यों को जीवित रखे हुए थे. इसके बावजूद आदिवासी और अनुसूचित जाति समुदायों ने देश की आत्मा को बचाए रखा.
भागवत शनिवार को मुंबई में आयोजित कर्मयोगी पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे. इस कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी राज्य के आदिवासी विकास मंत्री प्रो. अशोक उइके और महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर भी मौजूद थे।
उन्होंने आगे कहा कि वर्षों से आदिवासी समाज ने हमारी संस्कृति को संभाल कर रखा है और आदिवासी समाज हमें बहुत कुछ देता रहा है। उनकी यही प्रवृति भारत की सनातन संस्कृति की पहचान है और आदिवासियों ने सबका कल्याण करने की इसी प्रवृति को सहेज कर रखा है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज में शिक्षा का यह प्रसार संवेदना से किया जाने वाला कार्य है। यह दया से नहीं, जी तोड़ मेहनत से संभव है। डॉ. भागवत ने कहा कि सामान्य तौर पर देश के आम लोगों को जो सुविधाएं मिलती है वो आदिवासी समाज को नहीं मिल पातीं। उन्हें देश के मुख्य प्रवाह में लाए बिना समाज का विकास नहीं हो सकता।
समारोह में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि अब राजनीति की व्याख्या बदलने की जरूरत है। पावर पालिटिक्स या सत्ता पाना अब राजनीति नहीं है। राजनीति का अर्थ अब विकास और सामाजिक सेवा है।
नागपुर स्थित ‘स्वर्गीय लक्ष्मणराव मानकर स्मृति संस्था’ अब तक विदर्भ में चलाए जा रहे एकल विद्यालयों को अब पूरे महाराष्ट्र में विस्तारित करने जा रही है। यह संस्था नितिन गडकरी के मार्गदर्शन और मुंबई के जाने-माने व्यवसायी अतुल शिरोडकर की अध्यक्षता में काम करती है।

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