हिंदू धर्म में स्कंद षष्ठी का व्रत भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। वर्ष 2026 में स्कंद षष्ठी का विशेष महत्व है क्योंकि यह दिन शत्रुओं पर विजय, संतान सुख और जीवन की बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, स्कंद षष्ठी की रात को कुछ विशेष स्थानों पर दीपक प्रज्वलित करने से न केवल भगवान कार्तिकेय प्रसन्न होते हैं, बल्कि भक्तों को चमत्कारी लाभ भी प्राप्त होते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं दीप दान का महत्व।
रात में इन 5 जगहों पर जलाएं दीपक:
घर के मुख्य द्वार पर
घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर घी या तेल का दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। भगवान कार्तिकेय देव सेनापति हैं इसलिए द्वार पर दीप जलाने से वे आपके घर की शत्रुओं और बुरी नजर से रक्षा करते हैं।
भगवान कार्तिकेय या शिव प्रतिमा के समक्ष
अपने घर के मंदिर में भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा के सामने छह मुखी दीपक जलाएं। चूंकि कार्तिकेय जी के छह मुख हैं इसलिए छह बत्तियों का दीपक उनकी शक्ति का संचार करता है। इससे ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है।
पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे
स्कंद षष्ठी की शाम को किसी पुराने पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे दीपक जलाना अत्यंत फलदायी है। यह स्थान देवताओं का वास माना जाता है। यहाँ दीप दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
दक्षिण दिशा की ओर मुख करके
यदि आप शत्रुओं से परेशान हैं या कानूनी विवादों में फंसे हैं, तो रात के समय घर के दक्षिण भाग में एक सरसों के तेल का दीपक जलाएं। दक्षिण दिशा मंगल ग्रह और यम की दिशा मानी जाती है। भगवान कार्तिकेय मंगल के अधिपति देव हैं, अतः यहाँ दीप जलाने से साहस और विजय की प्राप्ति होती है।
तुलसी के पौधे के पास
तुलसी के पास घी का दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है। स्कंद षष्ठी पर ऐसा करने से पारिवारिक कलह समाप्त होते हैं और घर में सकारात्मकता का प्रवाह बढ़ता है।

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