भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्पष्ट विजन ‘सच्चा वादा और पक्का काम’ के अनुरूप प्रदेश सरकार किसानों से किए गए हर संकल्प को धरातल पर उतार रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पष्ट कहा है कि ‘मध्यप्रदेश का समृद्ध किसान ही विकसित भारत 2047 के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सच्चा वादा और पक्का काम, यही हमारी सरकार का संकल्प है। हमने किसानों से जो वादा किया, वह पूरा करके भी दिखाया है।’ किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस मंशा को विभाग हर योजना में आत्मसात कर रहा है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य और बोनस से किसानों को सीधा लाभ
किसानों से किए वादों को पूरा करने की दिशा में सरकार ने एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीदी की है। वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार द्वारा गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित था। राज्य सरकार ने उस पर 175 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस दिया, इस प्रकार 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी की गई थी। रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार द्वारा गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस अलग से दिया जा रहा है। इस प्रकार इस वर्ष प्रदेश में किसानों से गेहूं की खरीदी कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 25 रुपये अधिक है। उपार्जन केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई है और किसानों के खातों में सीधे भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
धान उत्पादक किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री कृषक प्रोन्नति योजना शुरू की गई है। इसके तहत धान की खेती करने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 4000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में दी जाती है।
यंत्रीकरण और वैज्ञानिक खेती से बढ़ रही किसानों की आय : कृषि मंत्री कंषाना
कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि कृषि उत्पादन की लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि यंत्रीकरण को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है। ई-कृषि यंत्र अनुदान योजना के तहत सुपर सीडर, रोटावेटर, कल्टीवेटर, बीज-उर्वरक ड्रिल आदि कृषि यंत्रों पर 40 से 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। प्रदेश के 2,500 कस्टम हायरिंग सेंटर से किसान किराए पर मशीनें ले रहे हैं। साथ ही बेहतर फसल उत्पादन एवं मृदा स्वास्थ्य के लिए एवं संतुलित पौध पोषण के लिए विभाग निःशुल्क मिट्टी परीक्षण कर रहा है। मिट्टी परीक्षण से नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर व सूक्ष्म पोषक तत्वों की जानकारी मिलती है, जिससे किसान संतुलित मात्रा में उर्वरक डालकर लागत घटा सकते हैं। जायद सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में प्रमाणित बीज भंडारित किए गए हैं और मूंग-उड़द बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। रायजोबियम कल्चर सभी विकासखंडों में निःशुल्क उपलब्ध है।
किसानों को 10 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली और ‘पर ड्रॉप-मोर क्रॉप’ योजना में ड्रिप-स्प्रिंकलर पर 55 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। पात्र किसानों को सोलर पंप 90 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जायद फसलों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल किया गया है और नुकसान होने पर 72 घंटे में सर्वे की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। मक्का, बाजरा, सोयाबीन की उन्नत किस्मों को बढ़ावा दिया जा रहा है। मक्का की एच.एम.-10, एच.क्यू.पी.एम.-1 जैसी 50 से 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन क्षमता वाली किस्में किसानों को उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मंत्री कंषाना ने कहा कि जायद सीजन में मूंग, उड़द, मक्का, सूरजमुखी जैसी फसलों को बढ़ावा देकर किसान 60 से 70 दिन में अतिरिक्त आय ले सकते हैं। दलहनी फसलें मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ा रही हैं। विभाग द्वारा ‘कृषि चौपाल’ व ‘किसान पाठशाला’ के माध्यम से हर गांव तक तकनीकी मार्गदर्शन पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि नरवाई न जलाएं और उसे खेत में मिलाकर जायद की बुवाई करें। ई-कृषि यंत्र अनुदान के लिए www.mpkrishi.mp.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश का किसान न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि विकसित भारत 2047 के निर्माण में मजबूत स्तंभ सिद्ध होगा।

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