दुर्ग.
ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद स्कूलों को खुले करीब एक सप्ताह हो गया है। मगर सभी बच्चों को पाठ्य पुस्तक नहीं मिल पाई है। किताबों की स्कैनिंग में हो रही तकनीकी परेशानी के चलते समय पर बच्चों को पाठ्य पुस्तक वितरित नहीं किया जा सका है। शिक्षक रोजाना स्कैनिंग के समस्या से जूझते नजर आ रहे हैं, क्योंकि स्कैनिंग के बिना बच्चों को पुस्तक देने की मनाही है।
शुरुआती दौर में पुस्तक वितरण को लेकर भी तरह-तरह की समस्याएं आई थी। नई प्रक्रिया के तहत सप्लाई किए जाने पाठ्य पुस्तक से भरी वाहनों के लोकेशन ट्रेस करने की सुविधा दी गई। स्कूलों में किताबें पहुंचने के बाद स्कैनिंग में तरह तरह की समस्या आई । कुल संकुल के शिक्षकों ने चालान का डिटेल अपलोड नहीं होना बताया । वही कुछ ने लॉगिन नहीं होने, लिंक में आईडी पासवर्ड इंट्री करने पर बार बार रिवर्स होना, प्रोसेस आगे नहीं बढ़ना बताया। कुछ स्कूलों में लॉगिन का होना बताया गया मगर बच्चों की संख्या जीरो दर्शाये जाने की जानकारी मिली है।
यह भी तथ्य सामने आया है कि जीरो कोड से शुरू होने पर स्कैनिंग में दिक्कत आने लगी है। कमोबेश यही समस्या यूडाइस नंबर से भी होने की खबर है। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस बार 16 जून से ही बच्चों को निःशुल्क किताब देने की व्यवस्था बनाई थी । किताबों की स्कैनिंग में आ रही तकनीकी समस्या ने समय पर बच्चों को पाठ्य पुस्तक देने की योजना पर पानी फेर गया। इस वजह से स्कूलों में किताब होने के बावजूद भी बच्चों को बांटा नहीं जा सका है। स्कैनिंग की समस्या को लेकर शिक्षकों ने अधीनस्थ अधिकारियों को अवगत कराया है।

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