जबलपुर
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के मामले में एक नया आदेश पारित किया है। दो याचिकाओं को हाई कोर्ट से रिकाल कर लिया है और 52 मामले जो पिछली बार सुप्रीम कोर्ट में ही रह गए थे, ट्रांसफर आर्डर में दर्ज नहीं हुए थे, उनको हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया है। अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण मामले में अंतिम बहस शुरू होगी।
वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह ने बताया कि हाई कोर्ट में ओबीसी आरक्षण के संबंध में विचार अधीन सभी मामलों को मध्य प्रदेश शासन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था। सभी मामले सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग खंडपीठ के समक्ष पेंडिंग थे।
जानकारी के अनुसार कोर्ट ने 87-13 के फार्मूले को चुनौती देने वाले मामले को रिकॉल किया गया है, जिसकी सुनवाई अप्रैल के दूसरे सप्ताह में होगी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 54 और याचिकाएं जबलपुर हाईकोर्ट में ट्रांसफर की हैं। ओबीसी आरक्षण से जुड़ी 103 याचिकाओं पर हाईकोर्ट 2 से 15 अप्रैल तक नियमित सुनवाई करेगा।
52 प्रकरण हाईकोर्ट ट्रांसफर किए गए
ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से कोर्ट में दलील देने वाले सीनियर अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण के प्रकरणों में 19 फरवरी 26 को पारित आदेश में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए 52 प्रकरणों को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट वापस भेजा है। ट्रांसफर केसो में से दो प्रकरण में अब सुप्रीम कोर्ट ही सुनवाई करेगा। संशोधित आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण के बकाया 52 प्रकरणों को जबलपुर हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया गया है।
इन प्रकरणों में ओबीसी वर्ग का शासन की ओर से पक्ष रखने के लिए राज्यपाल द्वारा नियुक्त विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं विनायक प्रसाद शाह ने बताया कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जबलपुर में ओबीसी आरक्षण के विचाराधीन सभी प्रकरणों को मध्य प्रदेश सरकार (महाधिवक्ता) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कराए गए थे, जो दो अलग-अलग बंचों में अलग-अलग खंडपीठ के समक्ष पेंडिंग थे।
जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे के समक्ष एक दर्जन मामले नियत थे। जिनमें ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेसर ने नियमित सुनवाई के आवेदन दाखिल किए थे। इनमें सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी को फाइनल आदेश पारित कर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस भेज दिए थे और सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति से उक्त समस्त प्रकरणों को विशेष बेंच गठित कर 3 महीने के अंदर निराकृत करने के आदेश पारित किए थे।
एसोसिएशन रिव्यू याचिका पर लिया निर्णय
ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दीपक कुमार पटेल के नाम से एक रिव्यू याचिका MA/529/26 दाखिल की गई थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने खुले न्यायालय में 20 मार्च को विस्तृत सुनवाई करते हुए 19 फरवरी को पारित आदेश में संशोधन कर 52 प्रकरण जो मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ट्रांसफर कराए गए थे, उनको भी 20 मार्च के आदेश से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस भेज दिए हैं, तथा दो विशेष अनुमत याचिकाएं जो पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस की गई थीं उन्हें सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने आदेश दिनांक 20/3/26 जो वेवसाइड पर 30/03/26 को अपलोड हुआ हैं ।
उक्त आदेश मे सुप्रीम कोर्ट ने दो एसएलपी जिनमे दीपक कुमार पटेल विरूध मध्य प्रदेश शासन एवं हरिशंकर बरोदिया विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन को अपने समक्ष सुनवाई के लिए वापस रिकॉल कर लिए गए हैं, शेष आदेश दिनांक 19 फरवरी यथावत रहेगा। ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से कोर्ट में दलील देने वाले सीनियर अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह, वरुण ठाकुर ने पक्ष रखा उन समस्त मामलों को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 2 अप्रैल 2026 को सुनवाई नियत हैं।

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