September 8, 2026

बिना नया ट्रांसमिशन कॉरिडोर बनाए बढ़ेगा बिजली ट्रांसफर, इंदौर में MP ट्रांसको ने शुरू किया क्षमता उन्नयन

इंदौर के पावर नेटवर्क को मिलेगी नई ताकत, एम पी ट्रांसको ने शुरू किया एचटीएलएस कंडक्टर से क्षमता उन्नयन- ऊर्जा मंत्री तोमर

मौजूदा 132 केवी लाइनों की क्षमता होगी करीब तीन गुना, बिना नया ट्रांसमिशन कॉरिडोर बनाए बढ़ेगा पावर ट्रांसफर

इंदौर

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि इंदौर शहर और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती विद्युत मांग तथा ट्रांसमिशन नेटवर्क पर बढ़ते पावर फ्लो को देखते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने इंदौर के महत्वपूर्ण 132 केवी ट्रांसमिशन नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए उन्नयन कार्य शुरू कर दिया है। इस कार्य में मौजूदा ट्रांसमिशन लाइनों के एसीएसआर पैंथर कंडक्टरों को अत्याधुनिक हाई टेम्परेचर लो सैग   एच टी एल एस कंडक्टरों से बदला जा रहा है।

 ऊर्जा मंत्री ने बताया कि अत्याधुनिक तकनीक के एचटीएलएस कंडक्टरों की करंट वहन क्षमता मौजूदा पैंथर कंडक्टरों की तुलना में काफी अधिक है। इसके परिणामस्वरूप मौजूदा ट्रांसमिशन लाइन के उसी कॉरिडोर में करीब तीन गुना अधिक विद्युत पावर ट्रांसफर किया जा सकेगा। इस तकनीक के माध्यम से बिना नया ट्रांसमिशन कॉरिडोर विकसित किए मौजूदा नेटवर्क की पारेषण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा रही है।

इंदौर साउथ जोन से चंबल तक दोनों सर्किट का उन्नयन

उन्नयन कार्य की शुरुआत खंडवा रोड स्थित 220 केवी इंदौर साउथ जोन सबस्टेशन से 132 केवी चंबल सबस्टेशन तक जाने वाली 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के दोनों सर्किट में की गई है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स तथा सत्य साईं सर्किट शामिल हैं।

साथ ही 220 केवी इंदौर नॉर्थ जोन सबस्टेशन, सांवेर रोड से 132 केवी चंबल सबस्टेशन, पोलोग्राउंड को जोड़ने वाली 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के दोनों सर्किट में भी एसीएसआर पैंथर कंडक्टरों को एचटीएलएस कंडक्टरों से बदलने का कार्य शुरू किया गया है।

14 फीडर बे भी होंगे अपग्रेड

ट्रांसमिशन लाइनों के कंडक्टर बदलने के साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े 14 फीडर बे के उन्नयन का कार्य भी प्रारंभ किया गया है। इनमें 132 केवी चंबल सबस्टेशन, 220 केवी इंदौर साउथ जोन सबस्टेशन, 220 केवी इंदौर नॉर्थ जोन सबस्टेशन, 132 केवी इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स सबस्टेशन तथा 132 केवी सत्य साईं सबस्टेशन से संबंधित फीडर बे शामिल हैं।

ट्रांसमिशन लाइनों की बढ़ी हुई करंट वहन क्षमता के अनुरूप संबंधित स्विचयार्ड एवं फीडर बे उपकरणों को भी अपग्रेड किया जाएगा। इससे केवल कंडक्टर की क्षमता बढ़ने तक सीमित न रहकर उससे जुड़े नेटवर्क में भी बढ़ी हुई विद्युत क्षमता का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

अधिक तापमान पर भी कम सैग के साथ काम करते हैं एचटीएलएस  कंडक्टर

एचटीएलएस कंडक्टर पारंपरिक एसीएसआर कंडक्टरों की तुलना में अधिक तापमान पर कार्य करने में सक्षम होते हैं और उच्च तापमान पर भी इनका सैग अपेक्षाकृत कम रहता है। यही तकनीकी विशेषता इन्हें मौजूदा ट्रांसमिशन लाइनों की क्षमता बढ़ाने के लिए उपयोगी बनाती है।

कंडक्टर की बढ़ी हुई थर्मल करंट वहन क्षमता के कारण मौजूदा ट्रांसमिशन नेटवर्क से अधिक विद्युत शक्ति का पारेषण किया जा सकता है। इससे नई ट्रांसमिशन लाइन के लिए अलग कॉरिडोर विकसित करने की आवश्यकता कम होती है और मौजूदा लाइन के माध्यम से ही अधिक पावर फ्लो संभव होता है।

बढ़ते शहरी विस्तार के बीच मौजूदा कॉरिडोर का होगा बेहतर उपयोग

 ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि इंदौर में तेजी से हो रहे शहरी विस्तार और बढ़ती निर्माण गतिविधियों के कारण नए ट्रांसमिशन कॉरिडोर के लिए राइट ऑफ वे  (आर ओ डब्ल्यू )उपलब्ध कराना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में मौजूदा ट्रांसमिशन लाइन के कॉरिडोर में ही कंडक्टर की क्षमता बढ़ाना एक महत्वपूर्ण तकनीकी विकल्प है।

एचटीएलएस कंडक्टरों के माध्यम से मौजूदा 132 केवी नेटवर्क में अधिक विद्युत शक्ति के पारेषण के साथ महत्वपूर्ण लाइनों पर लोडिंग का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा। इससे पावर फ्लो के लिए अतिरिक्त ऑपरेशनल मार्जिन भी उपलब्ध होगा।

इस क्षमता उन्नयन से इंदौर शहर और आसपास के क्षेत्रों की बढ़ती विद्युत आवश्यकताओं के अनुरूप ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही मौजूदा ट्रांसमिशन कॉरिडोर और उससे जुड़े स्विचयार्ड एवं फीडर बे इंफ्रास्ट्रक्चर का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकेगा।

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