नई दिल्ली
देश की राजधानी दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में सोमवार को 'राजाजी उत्सव' का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'राजाजी उत्सव' को एक अद्भुत पहल बताया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राष्ट्रपति भवन से जुड़ी पोस्ट की रीपोस्ट करते हुए लिखा कि 'राजाजी उत्सव' एक अद्भुत पहल है, जो राष्ट्र के प्रति राजाजी के समृद्ध योगदान के विभिन्न पहलुओं को उजागर करता है। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि आप इस उत्सव में अवश्य शामिल हों और इससे प्रेरणा लें! इससे पहले 22 फरवरी को पीएम मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में कहा कि देश गुलामी के प्रतीकों को पीछे छोड़कर भारत की संस्कृति से जुड़ी चीजों को महत्व देने लगा है। इस दिशा में 'राजाजी उत्सव' के रूप में हमारे राष्ट्रपति भवन ने भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान मैंने लाल किले से पंच प्राणों की बात कही थी। उनमें से एक है गुलामी की मानसिकता से मुक्ति। आज देश गुलामी के प्रतीकों को पीछे छोड़कर भारत की संस्कृति से जुड़ी चीजों को महत्व देने लगा है।"
उन्होंने बताया कि सी. राजगोपालाचारी स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल थे। वे उन लोगों में थे, जिन्होंने सत्ता को पद की तरह नहीं, सेवा की तरह देखा। सार्वजनिक जीवन में उनका आचरण, आत्मसंयम और स्वतंत्र चिंतन आज भी हमें प्रेरित करता है।
पीएम मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश प्रशासकों की मूर्तियां तो लगी रहने दी गईं, लेकिन देश के महान सपूतों को जगह नहीं दी गई। ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा भी राष्ट्रपति भवन में लगी हुई थी। उन्होंने कहा कि ये प्रदर्शनी 24 फरवरी से 1 मार्च तक चलेग चलेगी।"

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