इस्लामाबाद
दुनिया के कई देश घटती आबादी के संकट से परेशान हैं। इटली, जापान, रूस, साउथ कोरिया जैसे देशों में तेजी से आबादी कम हो रही है और हालात ऐसे हैं कि अस्तित्व के संकट तक की बात हो रही है। यहां तक कि भारत जैसे देश में भी अब प्रजनन दर तेजी से कम हो रही है। प्रति महिला जन्मदर अब भारत में 1.9 ही रह गई है, लेकिन पाकिस्तान की आबादी में तेजी से विस्फोट हो रहा है। बदलते दौर में भी पाकिस्तान की आबादी जिस तरह से बढ़ रही है, उससे देश के आगे संकट पैदा हो सकता है। पाकिस्तानी अखबार डॉन ने ही अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट में पाकिस्तान की पूरी व्यवस्था ही चरमराने का अनुमान जताया है।
पाकिस्तान की बढ़ती आबादी और उसके संसाधनों में असंतुलन का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह क्षेत्रफल के मामले में दुनिया का 33वां देश है। लेकिन आबादी के मामले में वह 5वें नंबर पर पहुंच गया है। कराची, लाहौर, पेशावर, रावलपिंडी, क्वेटा समेत तमाम शहरों की हालत यह है कि जरा सी बारिश भी बाढ़ जैसे हालात पैदा कर देती है। भारी आबादी के चलते कहीं भी रिहायश की सही व्यवस्था नहीं है और खेती का रकबा भी लगातार कम हो रहा है। क्लाइमेट चेंज और आर्थिक संकट जैसी समस्याएं अलग से घर रही हैं। फिलहाल पाकिस्तान की आबादी 241.5 मिलियन पर है।
अब यह अगले 5 सालों में 300 मिलियन यानी 30 करोड़ तक पहुंच गई है। यही नहीं 2050 में तो यह 40 करोड़ हो जाएगी। छोटे से देश की इतनी भीषण आबादी बड़ा संकट खड़ा कर सकती है। ऐसी स्थिति इसलिए है क्योंकि पाकिस्तान में प्रजनन दर 3.6 है। यह भारत के मुकाबले लगभग दोगुनी है। साउथ एशिया के देशों में किसी भी मुल्क की आबादी बढ़ने की ग्रोथ इतनी अधिक नहीं है। पाकिस्तान के बाद अफ्रीका के मुल्कों में ही आबादी बढ़ने की रफ्तार इतनी तेज देखी जा रही है। डॉन के मुताबिक इतनी भारी आबादी का असर हर सेक्टर पर दिख रहा है। एक तरफ बच्चे कुपोषित हैं तो वहीं उनके बड़े होने पर बेरोजगारी का संकट है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और हेल्थकेयर जैसी समस्याएं भी पैदा हो रही है। पाकिस्तान की बढ़ती आबादी के चलते हालात यह हैं कि 5 साल से कम आयु के 40 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं। इसके अलावा बच्चों को जन्म देने के दौरान ही 11 हजार माताओं की हर साल मौत हो जाती है। पाकिस्तान में गर्भ निरोधक उपायों के इस्तेमाल में कमी के चलते भी ऐसी समस्याएं पैदा हो रही हैं। इसकी वजह कुछ लोगों की कट्टरता है और वे गर्भनिरोध का इस्तेमाल नहीं करते। यही नहीं यह कट्टरता बढ़ती आबादी में एक और तरीके से खाज का काम करती है। पोलियो की दवा का विरोध किया जाता है और इसके चलते अकसर पाकिस्तान में पोलियो के केस मिल जाते हैं।

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