लखनऊ
अब घर में छोटी दुकान चलाने वालों को अलग से कॉमर्शियल बिजली कनेक्शन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नई बिजली टैरिफ नीति में इस तरह के उपभोक्ताओं के लिए नई श्रेणी का प्रावधान किया जा सकता है। इससे प्रदेश के लगभग 35 लाख बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। राज्य विद्युत नियामक आयोग इस दिशा में गंभीरता से विचार कर रहा है
प्रदेश में करीब 3.5 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं। – इसमें से लगभग 2.94 करोड़ घरेलू कनेक्शनधारी हैं। इनमें बड़ी संख्या (करीब 35 लाख) ऐसे लोगों की है, जो अपने घरों में किराना, स्टेशनरी, सब्जी या अन्य छोटे व्यवसाय संचालित करते हैं। वर्तमान व्यवस्था के तहत, इन दुकानों के लिए अलग से कॉमर्शियल कनेक्शन लेना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर बिजली चोरी के आरोप में कार्रवाई होती है।
प्रस्तावित नई टैरिफ नीति के तहत ऐसे छोटे दुकानदारों के लिए अलग श्रेणी निर्धारित की जा सकती है। उदाहरण के तौर पर जो उपभोक्ता 300 यूनिट तक बिजली खर्च करते हैं, उनसे घरेलू दरों पर ही शुल्क लिया जा सकता है। साथ ही नए कनेक्शन लेने वालों के लिए भी कुछ रियायत देने पर विचार किया जा रहा है।
अभी घरेलू कनेक्शन पर बिजली की दर लगभग 4 से 5 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि कॉमर्शियल कनेक्शन के लिए यह दर करीब 8 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच जाती है। इसके अलावा न्यूनतम अधिभार शुल्क भी लगभग 500 रुपये होता है। यदि अलग कनेक्शन की अनिवार्यता समाप्त होती है, तो छोटे दुकानदार जो केवल बल्ब और पंखे जैसी सीमित बिजली उपकरणों का उपयोग करते हैं उन्हें घरेलू दरों पर ही बिजली मिल सकेगी।
दरों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं
बिजली दरों में बढ़ोतरी के फिलहाल आसार नहीं दिख रहे। पॉवर कॉर्पोरेशन ने 1.15 लाख करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व आवश्यकता का प्रस्ताव दिया है, जबकि बिजली आपूर्ति की लागत 8.50 से 8.80 रुपये प्रति यूनिट आंकी गई है। हालांकि, उपभोक्ताओं के पक्ष में लगभग 51 हजार करोड़ रुपये का सरप्लस बताया जा रहा है। ऐसे में संभावना है कि जून माह में जारी होने वाली नई दरों में वृद्धि न की जाए।

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