वाशिंगटन
अमेरिका ने इज़रायल, कतर, कुवैत और यूएई को 8.6 बिलियन डॉलर्स (करीब 81 हज़ार करोड़ रूपए) के हथियार बेचने का ऑफर दिया है। इन हथियारों में कई एडवांस वेपन्स, मिसाइलें, एयर एंड मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स शामिल हैं। ये हथियार इन देशों को दुश्मन के हमलों से बचाव और सटीक जवाबी कार्रवाई की क्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस की समीक्षा को दरकिनार करते हुए यह फैसला लिया है।
क्षेत्रीय सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए ज़रूरी
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार इन चारों देशों को हथियार बेचना मिडिल ईस्ट की क्षेत्रीय सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए ज़रूरी है। अमेरिका का मानना है कि इन देशों के हथियारों स्टॉक की भरपाई और रक्षा क्षमता मजबूत करना ज़रूरी है, ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे। ट्रंप प्रशासन ने इसे आपातकालीन ज़रूरत बताया, क्योंकि सामान्य प्रक्रिया में कांग्रेस को 30 दिन का समय मिलता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह डील अमेरिका की मिडिल ईस्ट (Middle East) नीति को दर्शाता है और अमेरिकी रणनीतिक हितों को मज़बूत करने की दिशा में अहम कदम है।
आलोचना हुई शुरू
हालांकि कुछ आलोचक अमेरिका के इस प्रस्ताव को महंगा और अनावश्यक बता रहे हैं, खासकर जब अमेरिका में घरेलू मुद्दे लंबित हैं। गौरतलब है कि ईरान के खिलाफ युद्ध से अमेरिका के हथियारों का स्टॉक काफी कम हो गया है।

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