फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), डीपफेक कंटेंट को प्लेटफॉर्म्स पर दिखाने के लिए माफी मांगी है। केंद्र सरकार के बीच चल रहे विवाद के बीच उन्होंने अपना माफी नामा भेजा है। यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब केंद्र सरकार और मेटा के अधिकारियों के बीच में हाल ही में एक बैठक हुई थी। इसमें सोशल मीडिया साइट्स पर चल रहे CSAM और डीपफेक कंटेंट को लेकर बात की गई थी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मेटा चीफ को साफ तौर पर बताया गया कि वह किसी मध्यस्थ की भूमिका में नहीं आते हैं। मेटा ही इस बात को तय करता है कि किसे कौनसा कंटेंट मिलेगा और कैसे मिलेगा। इसलिए, IT एक्ट के तहत मिलने वाली 'सेफ हार्बर' (सुरक्षा) की सुविधा उन पर लागू नहीं होती।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेटा चीफ ने अपने माफी नामे में इस बात को स्वीकार किया है कि कुछ खास तरह के कंटेंट को बूस्ट करने के लिए काफी पैसे दिए गए थे। उन्होंने इस मामले में माफी मांगी और अपनी गलती पर अफसोस जताया।
बता दें, जुकरबर्ग की यह माफी उस जांच से जुड़ी हुई है, जिसमें यह सामने आया था कि मेटा के प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े एड चलाए जा रहे हैं। BBC EYE के मुताबिक करीब 30 अलग-अलग विज्ञापनों की पहचान की गई थी, जिनमें यौन शोषण को बढ़ावा दिया जा रहा था। बाद में इसकी जानकारी भारतीय अधिकारियों को दी गई। इसके बाद इस मामले में मेटा से जवाब मांगा गया था।

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