नई दिल्ली
एक वक्त था जब घर में किसी को गंभीर बीमारी (जैसे कैंसर या हार्ट अटैक) हो जाती थी, तो इलाज के लिए घर, जमीन और जेवर तक बेचने पड़ जाते थे. गरीब आदमी डॉक्टर के पास जाने से डरता था कि कहीं बच्चों का भविष्य न दांव पर लग जाए. लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है।
नोएडा फिल्म सिटी में आयोजित 'HealthWealth Summit 2026' का आगाज करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने देश के हेल्थकेयर सिस्टम का पूरा रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखा. उन्होंने दो टूक कहा कि एक विकसित भारत (Developed India) तभी बन सकता है, जब देश के 140 करोड़ लोग स्वस्थ होंगे. आइए जानते हैं स्वास्थ्य मंत्री के भाषण की वे बड़ी बातें, जिन्होंने इस समिट की दिशा तय कर दी है।
इलाज से ज्यादा 'प्रिवेंशन' पर जोर
जेपी नड्डा ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि पहले डॉक्टर कहते थे, 'एंटीबायोटिक ले लो, सब खाओ, कोई परहेज नहीं.' यानी हमारा पूरा सिस्टम सिर्फ बीमारी होने के बाद इलाज (Cure) पर टिका था. लेकिन साल 2017 में आई नई नेशनल हेल्थ पॉलिसी ने इस सोच को बदला. अब सरकार प्रिवेंशन (बचाव), प्रमोशन, और होलिस्टिक अप्रोच पर काम कर रही है, जिसमें प्राइमरी से लेकर टर्शरी हेल्थकेयर तक एक मजबूत चेन बनाई जा रही है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर और डिजिटल ट्रैकिंग का कमाल
देश के कोने-कोने तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए खड़े किए गए 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) गेमचेंजर साबित हुए हैं. मंत्री ने आंकड़े रखते हुए बताया कि 30 साल से ऊपर के 44 करोड़ लोगों की हाइपरटेंशन और डायबिटीज की स्क्रीनिंग की गई है. करोड़ों लोगों में शुरुआती स्तर पर ही बीमारियों का पता लगाकर उनका इलाज शुरू किया गया है।
गर्भवती महिलाओं (माताओं) और बच्चों के टीकाकरण को 'U-Win' पोर्टल के जरिए पूरी तरह डिजिटाइज कर दिया गया है. आज देश में इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी 70-71% से बढ़कर 90% तक पहुंच चुकी है।
मेडिकल एजुकेशन में बंपर उछाल
देश में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए नड्डा ने बताया कि देश में एम्स (AIIMS) की संख्या 1 से बढ़कर सीधे 23 हो गई है. मेडिकल कॉलेज 387 से बढ़कर 1,063 हो गए हैं. यूजी (UG) और पीजी (PG) की सीटें तेजी से बढ़ाई जा रही हैं और सरकार इसके लिए हजारों करोड़ का निवेश कर रही है ताकि देश को बेहतरीन डॉक्टर मिल सकें।
दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ कवरेज: आयुष्मान भारत
गरीबों के लिए संजीवनी बनी आयुष्मान भारत योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज 61 करोड़ लोगों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त हेल्थ कवर मिल रहा है. इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि 70 साल से ऊपर के बुजुर्गों को उनकी आर्थिक स्थिति या कास्ट-क्रीड देखे बिना, जीवन के अंतिम सांस तक 5 लाख रुपये का फ्री हेल्थ इंश्योरेंस मिल रहा है. 'लांसेट' की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आज कैंसर जैसे गंभीर रोगों का पता चलते ही 90% मरीजों को एक महीने के भीतर इलाज मिलना शुरू हो जाता है।
सस्ती दवाएं और 'अमृत' फार्मेसी
आम आदमी के जेब का खर्च (आउट ऑफ पॉकेट खर्च) जो कभी 63% हुआ करता था, वह घटकर अब करीब 43-44% पर आ गया है. जन औषधि केंद्रों और 'अमृत' फार्मेसियों (जहां 50% डिस्काउंट पर दवाइयां और इम्प्लांट्स मिल रहे हैं) के जरिए लोगों के करोड़ों रुपये बचाए जा रहे हैं।
युवाओं को खास सलाह: 'बॉडी को एब्यूज मत कीजिए!'
अपने भाषण के अंत में जेपी नड्डा ने युवाओं को एक बेहद प्रैक्टिकल और सख्त सलाह दी. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'समस्या न करने में ही समाधान है! अपने शरीर को पहचानिए, अपनी बॉडी को एब्यूज मत कीजिए. यंग जनरेशन को हेल्दी हैबिट्स और लाइफस्टाइल अपनाने की जरूरत है, ताकि आपको और आपके परिवार को अस्पतालों के चक्कर न काटने पड़ें।

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