नई दिल्ली
सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के जाने और वीडियोग्राफी पर रोक लगाने के उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकार के सर्कुलर को सुप्रीम कोर्ट मे चुनौती दी गई है. वकील नरेंद्र मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर यह सर्कुलर रद्द करने की मांग की है. याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकारों का ये आदेश संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(1)(g), 21 और 21-A का सीधा सीधा उल्लंघन करता है।
इस सर्कुलर के जरिए सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों, पत्रकारों, यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया पर्सन्स और सिविल-सोसाइटी के रिप्रेजेंटेटिव्स की बिना समुचित इजाजत लिए दाखिल होकर शूटिंग या अन्य कार्यवाही संचालित करने पर रोक लगाई गई है. सर्कुलर स्कूल में बिना समुचित इजाजत लिए फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव-स्ट्रीमिंग पर पाबंदी लगाता है।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के उल्लंघन का हवाला देते हुए कहा गया है कि यह सर्कुलर मीडिया और नागरिकों के 'अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता' के अधिकार को प्रभावित करता है. स्कूलों की कमियों या सच्चाई को उजागर करने से रोकना सूचना के अधिकार में बाधा है।
इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव है. सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में क्या चल रहा है, यह जानने का हक जनता को है. प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाने से भ्रष्टाचार और लापरवाही को बढ़ावा मिल सकता है।
अनुच्छेद 21 के तहत शिक्षा और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का हनन किए जाने के तर्क के साथ जनहित याचिका में कहा गया है कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं या शिक्षकों की कमी को छुपाने के लिए यह सर्कुलर लाया गया है, जो बच्चों के शिक्षा के अधिकार (RTE) को प्रभावित करता है।

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