नई दिल्ली
आयकर विभाग ने सोमवार को बताया कि देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह एक अप्रैल से 11 जनवरी तक की अवधि में सालाना आधार पर पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 8.8 प्रतिशत बढ़कर 18.37 लाख करोड़ रुपए हो गया है। वित्त वर्ष 25 की समान अवधि में शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.88 लाख करोड़ रुपए रहा था।आयकर विभाग की ओर से जारी प्रेस रिलीज में बताया गया कि समीक्षा अवधि में शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह 8.63 लाख करोड़ रुपए रहा है।
वहीं, शुद्ध व्यक्तिगत कर संग्रह 9.29 लाख करोड़ रुपए रहा है। सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) संग्रह 44,866.52 करोड़ रुपए रहा है। इसके साथ सरकार ने अन्य टैक्स के रूप में 321.23 रुपए एकत्रित किए हैं।
आयकर विभाग ने कहा कि समीक्षा अवधि में 3.11 लाख करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया गया है, इसमें पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 16.92 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
इसमें से सरकार ने 1.83 लाख करोड़ रुपए का रिफंड कॉरपोरेट्स को, जबकि व्यक्तिगत करदाताओं को 1.28 लाख करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया गया है।
वित्त वर्ष 25 की समान अवधि में यह आंकड़ा 3.75 लाख करोड़ रुपए था।
अगर रिफंड को मिला दिया जाए तो सकल कर संग्रह एक अप्रैल से 11 जनवरी की अवधि में सालाना आधार पर 4.14 प्रतिशत बढ़कर 21.49 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
इसमें से सकल कॉरपोरेट कर संग्रह 10.46 लाख करोड़ रुपए और सकल व्यक्तिगत कर संग्रह 10.58 लाख करोड़ रुपए रहा है।
भारत में कर संग्रह मजबूत रहने की वजह देश की अर्थव्यवस्था का तेजी से बढ़ना है।
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026 के लिए रियल जीडीपी वृद्धि 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जो कि एनएसओ के पहले अग्रिम अनुमान 7.4 प्रतिशत से अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के लिए बाजार का औसत अनुमान 7.5 प्रतिशत है, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का अनुमान 7.3 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी खर्च और मौद्रिक नीति के समर्थन, लोगों की खरीदारी की क्षमता में सुधार और रोजगार की बेहतर स्थिति के चलते उपभोग यानी खपत में बढ़ोतरी होगी, जिससे आर्थिक सुधार को और मजबूती मिलेगी।

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