बिलासपुर.
हाईकोर्ट ने कहा है कि निःसंतान और असहाय सौतेली मां को केवल सौतेली मां होने के आधार पर भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश निरस्त करते हुए 77 वर्षीय विधवा महिला को उसके तीन सौतेले बेटों से हर माह कुल 9 हजार रुपये भरण-पोषण दिलाने का आदेश दिया है, जिसमें प्रत्येक बेटे को तीन-तीन हजार रुपये प्रतिमाह देने होंगे, जिसका भुगतान सितंबर 2026 से शुरू होगा। दरअसल, महिला ने फैमिली कोर्ट में तीनों सौतेले बेटों से हर माह 20 हजार भरण-पोषण की मांग की थी। उसका कहना था कि पति की मृत्यु के बाद बेटों ने उसकी देखभाल बंद कर दी। दावा किया कि उसने अपने स्त्रीधन और पैतृक संपत्ति से कृषि भूमि खरीदी थी, लेकिन उसे आय में कोई हिस्सा नहीं दिया जा रहा था।
हाईकोर्ट ने गुजरात के फैसले का दिया हवाला
फैमिली कोर्ट ने इस आधार पर याचिका खारिज कर दी थी कि संबंधित युवक उसके सौतेले बेटे हैं। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कीर्तिकांत डी. वडोदिया बनाम गुजरात राज्य के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि निःसंतान सौतेली मां, यदि विधवा है और स्वयं का भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं है तो परिस्थितियों के अनुसार सौतेले बेटों से भरण-पोषण मांग सकती है।

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