इंदौर
हाईकोर्ट की सिंगल बैंच ने सोमवार को एनईईटी-यूजी के छात्रों की दोबारा परीक्षा कराने के आदेश जारी किए थे। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने इसके खिलाफ युगलपीठ में अपील की। मंगलवार को जस्टिस विवेक रुसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी।
4 मई को आयोजित की गई थी परीक्षा
डिप्टी एडवोकेट जनरल रोमेश दवे ने बताया कि, 4 मई को एनटीए ने पूरे देश में परीक्षा आयोजित की थी। इंदौर में उस दिन आंधी-तूफान व बारिश हुई थी। इंदौर के कुछ सेंटर्स की बिजली गुल हो गई थी। इसको लेकर कुछ छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। दोबारा परीक्षा लेने की मांग की थी।
एमपी हाई कोर्ट युगलपीठ में एकलपीठ के फैसले पर लगाई रोक
मामले में मंगलवार को हाईकोर्ट की युगलपीठ में सुनवाई हुई। एनटीए की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखा। उन्होंने एकलपीठ के फैसले पर स्टे दिए जाने की मांग रखते हुए कहा कि इस फैसले को लागू करना गलत होगा। परीक्षा में 22 लाख छात्रों ने भाग लिया था। इन 75 छात्रों के लिए अलग से पेपर सेट करना होगा, उसमें ये बात भी सामने आ सकती है कि 22 लाख छात्र ये आरोप लगाएं कि उनका पेपर टफ था, जबकि इनका सरल। ऐसे में नई कंट्रोवर्सी खड़ी हो जाएगी।
छात्रों के वकील ने किया विरोध
कोर्ट में याचिका दायर करने वाले छात्रों के वकील ने विरोध करते हुए कहा कि काउंसलिंग शुरू हुई तो उस स्थिति में उनका भविष्य उलझ जाएगा। सेशन शुरू होने पर उनका नुकसान होगा। कोर्ट ने सोमवार को जारी आदेश पर फिलहाल रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए। साथ ही छात्रों को नोटिस जारी करते हुए जवाब पेश करने के लिए कहा है। अब 10 जुलाई को सुनवाई हो सकती है।

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