नई दिल्ली
केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है। ये सिफारिशें लागू होने में करीब डेढ़ साल लग जाएंगे। इस वेतन आयोग से कर्मचारियों के संगठन की डिमांड शुरू हो गई है। कर्मचारियों के संगठन को बेसिक सैलरी से लेकर महंगाई भत्ते तक में बड़े बदलाव की उम्मीद है। माना जा रहा है कि यह वेतन आयोग केवल सैलरी बढ़ोतरी तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यह ग्रामीण और शहरी कर्मचारियों के बीच के अंतर को भी प्रभावित कर सकता है।
HRA (हाउस रेंट अलाउंस) का अंतर
आठवां वेतन आयोग HRA (हाउस रेंट अलाउंस) में बड़े संशोधन कर सकता है। खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में किराया, परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य खर्च अपेक्षाकृत अधिक होते हैं। ऐसे में यदि HRA की दरों में संशोधन होता है तो शहरी कर्मचारियों को बड़ा फायदा मिलेगा। इसके उलट, ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन-यापन की लागत कम होने के कारण वेतन वृद्धि का वास्तविक लाभ बचत के रूप में ज्यादा दिख सकता है।
सिटी कैटेगरी पर भी पड़ेगा असर?
आठवें वेतन आयोग में शहरों के कैटेगरी को लेकर भी अपडेट आ सकता है। बता दें कि 7वें वेतन आयोग में शहरों को X, Y और Z कैटेगरी में बांटा गया था। अगर 8वां वेतन आयोग इस वर्गीकरण में बदलाव करता है, तो छोटे शहरों और कस्बों के कर्मचारियों को अतिरिक्त फायदा मिल सकता है। ट्रैवल अलाउंस यानी TA में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है।
क्या है डिमांड
हाल ही में National Council (स्टाफ साइड) की अहम बैठक में 8वें वेतन आयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के केंद्र में वेतन संरचना, पदोन्नति नीति, वार्षिक वेतनवृद्धि और पेंशन सुधार जैसे विषय रहे। 8वें वेतन आयोग द्वारा वेबसाइट पर पूछे गए 18 सवालों के जवाब तय समयसीमा के भीतर भेजने पर सहमति बनी है। अगले 10 से 15 दिनों में सभी कर्मचारी संगठनों की मांगों को समेटते हुए एक साझा ज्ञापन तैयार किया जाएगा, जिसे आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना देसाई को सौंपा जाएगा।
पेंशन पर क्या डिमांड?
बैठक में फिटमेंट फैक्टर को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई। संगठनों की मांग है कि कर्मचारियों और लगभग 68 लाख पेंशनरों/पारिवारिक पेंशनरों के लिए समान फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाए। प्रतिनिधियों ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन सिस्टम (UPS) को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की पुरानी मांग दोहराई।
कर्मचारी संगठनों ने प्रत्येक कर्मचारी को सेवा अवधि में कम से कम पांच पदोन्नति सुनिश्चित करने की मांग रखी। स्वास्थ्य सुविधाओं के तहत CGHS से वंचित शहरों में कर्मचारियों को वर्तमान में 1,000 रुपये मासिक भत्ता मिलता है। कर्मचारी संगठनों ने इसे बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह करने की मांग की है। साथ ही इंटरनेट जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए भत्ता शामिल करने का प्रस्ताव भी रखा गया।

More Stories
Jeep ने पेश किया नया Special Edition, जानिए कितनी है कीमत और क्या-क्या मिला नया
UPI One-Click Payment Proposal: Google Pay और PhonePe की बल्ले-बल्ले, Paytm-CRED क्यों हुए परेशान?
Crude Oil 100 डॉलर के पार तो महंगा होगा सब कुछ? जानिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर कितना पड़ेगा असर