मुख्यमंत्री योगी के सख्त निर्देशों का असर, उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में आई उल्लेखनीय कमी
योगी सरकार के सक्रिय प्रयासों से अब किसान फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों की ओर हो रहे अग्रसर
20 प्रमुख जनपदों में पराली जलाने की घटनाओं में स्पष्ट कमी दर्ज की गई है
एटा, कौशांबी, सीतापुर और उन्नाव जैसे जनपदों में सबसे कम पराली जलाने की घटनाएं
लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों और सतत मॉनिटरिंग के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। राज्य सरकार के सक्रिय प्रयासों से अब किसान फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
कम हुई पराली जलाने की घटनाएं
मथुरा, पीलीभीत, सहारनपुर, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, कौशांबी, एटा, हरदोई, जालौन, फतेहपुर, महराजगंज, कानपुर देहात, झांसी, मैनपुरी, बहराइच, इटावा, गोरखपुर, अलीगढ़, उन्नाव और सीतापुर जैसे कुल 20 जनपदों में पराली जलाने की घटनाओं में स्पष्ट कमी दर्ज की गई है। इसमें भी एटा, कौशांबी, सीतापुर और उन्नाव जैसे जनपदों में सबसे कम पराली जलाने की घटनाएं हुई हैं। यह स्थिति बताती है कि मुख्यमंत्री योगी के निर्देशों का जमीनी असर दिखाई देने लगा है।
सेटेलाइट से की जा रही निगरानी
सीएम योगी ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को निर्देशित किया था कि पराली जलाने की घटनाओं की सेटेलाइट से निगरानी की जाए। साथ ही किसानों को वैकल्पिक उपायों के प्रति जागरूक किया जाए। प्रशासन द्वारा किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों, कंपोस्टिंग तकनीक और बायो-डीकंपोजर के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
जुर्माने और जिम्मेदारी की सख्त व्यवस्था
राज्य सरकार ने पराली जलाने वालों के खिलाफ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति शुल्क तय किया है। इसके अनुसार, दो एकड़ से कम क्षेत्र पर ₹2,500, दो से पांच एकड़ तक ₹5,000, पांच एकड़ से अधिक पर ₹15,000 क्षतिपूर्ति शुल्क लगेगा। साथ ही प्रत्येक 50 से 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जा रही है, जो अपने क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित करेंगे।

More Stories
योगी सरकार में युवाओं के लिए सरकारी सेवाओं के बढ़े अवसर, 520 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू
योगी सरकार में पारदर्शी चयन प्रक्रिया को गति, प्रवर्तन कांस्टेबल के 477 पदों पर अंतिम परिणाम जारी
योगी सरकार के ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से मिलेगी नई गति