भोपाल
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'जल जीवन मिशन' योजना के तहत मध्य प्रदेश के कई जिलों में अभी भी लक्ष्य हासिल करने की रफ्तार धीमी बनी हुई है। राज्य के 55 जिलों में से 23 जिले ऐसे हैं जहां पीने के पानी का नल कनेक्शन कवरेज 70 प्रतिशत से कम है, जबकि करीब 10 जिले तो ऐसे हैं जहां यह आंकड़ा 50 प्रतिशत से भी नीचे है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अनुसार, वर्तमान में राज्य के ग्रामीण परिवारों में 77.21% फंक्शनल टैप वाटर कनेक्शन की कवरेज दर्ज की गई है। कम कवरेज का मुख्य कारण उन मल्टी-विलेज और बल्क वॉटर सप्लाई योजनाओं को माना जा रहा है जो अभी भी क्रियान्वयन के चरण में हैं।
सीहोर में 43%, विदिशा में 33% परिवार वंचित
सीहोर में 56.95% परिवारों तक ही नल जल पहुंचा है, यानी करीब 43% परिवार अभी इस सुविधा से वंचित हैं, वहीं विदिशा में नल जल कवरेज 66.67% है। यहां करीब 33% परिवारों तक अभी घरेलू नल जल कनेक्शन नहीं पहुंचा है।
23 जिले 70% कवरेज से नीचे
प्रदेश के 23 जिले ऐसे हैं, जहां नल जल कवरेज 70% से कम है। इनमें मऊगंज, अशोकनगर, पन्ना, सतना, अलीराजपुर, छतरपुर, सिंगरौली और मैहर के अलावा जबलपुर, बड़वानी, डिंडोरी, टीकमगढ़, रतलाम, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, गुना, नीमच, रीवा, शिवपुरी और सीधी शामिल हैं।
बड़े जल प्रोजेक्ट पूरे होने पर कवरेज बढ़ने की उम्मीद
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के मुताबिक, कम कवरेज वाले ज्यादातर जिले बहु-ग्राम जल योजनाओं (MVS) और थोक जल आपूर्ति परियोजनाओं पर निर्भर हैं।
इनमें से कई परियोजनाएं अभी निर्माण, कार्यान्वयन या पूर्णता के अलग-अलग चरणों में हैं। विभाग का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद संबंधित जिलों में नल जल कवरेज बढ़ने की उम्मीद है।
155 प्रयोगशालाओं में हो रही पानी की जांच
प्रदेश में जल गुणवत्ता की जांच के लिए कुल 155 प्रयोगशालाएं संचालित हैं। इनमें 103 उप-मंडल स्तर, 51 जिला स्तर और एक राज्य स्तरीय प्रयोगशाला शामिल है।
सभी प्रयोगशालाओं में माइक्रोबायोलॉजिकल जांच की सुविधा उपलब्ध है। हालांकि, बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) की जांच केवल राज्य स्तरीय प्रयोगशाला में होती है। वहीं, रासायनिक विषाक्तता की जांच के लिए फिलहाल सुविधा उपलब्ध नहीं है।
बुरहानपुर और निवाड़ी ने हासिल की है बड़ी उपलब्धि
अगस्त 2019 में शुरू किए गए जल जीवन मिशन का मुख्य उद्देश्य हर ग्रामीण घर को नल कनेक्शन उपलब्ध कराना है। इस दिशा में मध्य प्रदेश के कुछ जिलों ने अनुकरणीय कार्य भी किए हैं। मसलन, जुलाई 2022 में बुरहानपुर देश का पहला 'हर घर जल' प्रमाणित जिला बना था, जबकि जून 2023 में निवाड़ी ने शत-प्रतिशत घरेलू नल कनेक्शन का लक्ष्य हासिल किया था। हालांकि, राज्य के बाकी हिस्सों में बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर और भौगोलिक चुनौतियों के कारण काम की गति धीमी रही है, जिसे अमलीजामा पहनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सीएजी ऑडिट रिपोर्ट ने उठाई कार्यप्रणाली पर उंगलियां
इस बीच, गत 22 जुलाई को मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश की गई एक कैग ऑडिट रिपोर्ट ने इस योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में धीमी गति, प्रोजेक्ट एस्टीमेट में अनियमितताओं और अपर्याप्त पानी की गुणवत्ता जांच का मुद्दा उठाया गया है। साथ ही गुणवत्ता नियंत्रण और मॉनिटरिंग को लेकर भी चिंता जताई गई है। आंकड़ों के मुताबिक, जल गुणवत्ता प्रबंधन सूचना प्रणाली के तहत 2026-27 में 3 अगस्त तक 2,41,187 पानी के नमूनों की जांच की गई, जिसमें 47 दूषित पाए गए और 18 जगहों पर सुधारात्मक उपाय किए गए। राज्य में वर्तमान में 103 सब-डिवीजनल, 51 जिला-स्तरीय और 1 राज्य-स्तरीय लैब समेत कुल 155 ऑपरेशनल वॉटर-टेस्टिंग लैब काम कर रही हैं।
- मध्य प्रदेश के 55 में से 23 जिलों में नल-जल कवरेज 70% से कम और 10 जिलों में 50% से नीचे है
- पीएचईडी के आंकड़ों के अनुसार राज्यभर में 77.21% ग्रामीण परिवारों को फंक्शनल टैप कनेक्शन मिल चुके हैं
- विधानसभा में पेश सीएजी रिपोर्ट में धीमी प्रगति, प्रोजेक्ट अनुमानों में गड़बड़ी और मॉनिटरिंग पर उठाए गए सवाल
- राज्य में कुल 155 वॉटर-टेस्टिंग लैब सक्रिय हैं, जिनके जरिए पानी के नमूनों की नियमित जांच की जा रही है

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