नई दिल्ली
कैंसर का इलाज सिर्फ मरीज के लिए नहीं बल्कि पूरे परिवार के लिए बड़ी चुनौती होता है. अस्पताल के खर्च के साथ हर महीने दवाइयों पर हजारों से लेकर लाखों रुपए तक खर्च करने पड़ सकते हैं. ऐसे में कैंसर की कुछ दवाओं की कीमतों में 93 फीसदी तक की कटौती मरीजों के लिए बड़ी राहत बन सकती है. मिसाल के तौर पर जिस ब्रांड की पल्बोसिक्लिब कैप्सूल की कीमत अभी 40,421 रुपए है वह नई दरों पर 2,720 रुपए में मिलेगी. इसी तरह थायोटेपा इंजेक्शन की कीमत 80,072 रुपए से घटकर 7,150 रुपए हो जाएगी. केंद्र सरकार की दवा मूल्य नियामक संस्था NPPA की नई मूल्य सूची में कई ऐसी कटौतियां सामने आई हैं।
लेकिन इस राहत की एक दूसरी तस्वीर भी है. कैंसर की कई नई और बेहद महंगी दवाओं की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. फेफड़ों के कैंसर में इस्तेमाल होने वाली ओसिमर्टिनिब की 30 गोलियों का पैक अभी भी 4.16 लाख रुपए का रहेगा. यानी सभी कैंसर दवाएं सस्ती नहीं हुई हैं. NPPA ने 17 अक्टूबर को 137 कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन की सीमा तय करने का आदेश दिया था. नई कीमतें 9 नवंबर से लागू होनी हैं. कंपनी से मिली जानकारी के आधार पर 27 अक्टूबर तक तैयार सूची में 543 ब्रांड और पैक की कीमतें दर्ज हैं. इनमें कई दवाओं की कीमत घटी है जबकि कुछ की कीमत पहले जैसी ही रखी गई है।
सरकार ने दवाओं की कीमतें घटाने के लिए क्या किया?
NPPA ने 137 कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को GST छोड़कर अधिकतम खुदरा मूल्य यानी MRP के 30 फीसदी तक सीमित किया है. इसे ट्रेड मार्जिन रैशनलाइजेशन कहा जाता है. ट्रेड मार्जिन का मतलब दवा कंपनी से स्टॉकिस्ट या डिस्ट्रीब्यूटर को मिलने वाली कीमत और मरीज से वसूले जाने वाले अधिकतम खुदरा मूल्य के बीच का अंतर है. इस कदम का मकसद उन दवाओं की कीमतों में कमी लाना है जो पहले से सीधे सरकारी मूल्य नियंत्रण के दायरे में नहीं थीं. सरकार के आदेश में पेटेंट वाली दवाएं भी शामिल हैं. हालांकि कीमत में वास्तविक बदलाव इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित दवा पर नई सीमा कैसे लागू होती है।
543 दवाओं में से कितनों की कीमत घटी?
NPPA की सूची के मुताबिक 543 ब्रांड और पैक में से 397 की कीमतें कम हुई हैं. वहीं 146 की कीमतों में कोई बदलाव नहीं दिखाया गया. कुल 97 दवाओं या पैक की कीमतों में 70 फीसदी या उससे ज्यादा की गिरावट दर्ज है. इनमें 50 की कीमत 80 फीसदी या उससे ज्यादा घटी है. पांच दवाओं की कीमतों में कटौती 90 फीसदी से अधिक है. पल्बोसिक्लिब के अलावा रक्त कैंसर में इस्तेमाल होने वाली डासैटिनिब की 60 गोलियों का पैक 17,811 रुपए से घटकर 1,808 रुपए हो जाएगा. प्रोस्टेट कैंसर की दवा एबिराटेरोन की 120 गोलियों का पैक 36,089 रुपए से घटकर 4,064 रुपए होगा. वहीं बेवाकिजुमैब इंजेक्शन की कीमत 65,205 रुपए से घटकर 8,957 रुपए हो जाएगी।
इन महंगी दवाओं पर नहीं मिली राहत
नई सूची में कुछ दवाओं की पुरानी और नई कीमत समान बनी हुई है. इनमें ओसिमर्टिनिब का टैग्रीसो ब्रांड 4.16 लाख रुपए और एलेक्टिनिब का एलेसेन्सा ब्रांड 4.31 लाख रुपए पर बना रहेगा. इमजुडो इंजेक्शन की कीमत 4.18 लाख रुपए और जेम्परली की 500 mg खुराक की कीमत 3.91 लाख रुपए है. इवोसिडेनिब की 60 गोलियों का पैक 6.58 लाख रुपए और सेलुमेटिनिब की 60 कैप्सूल का पैक 10.22 लाख रुपए पर बना रहेगा. कैंसर विशेषज्ञों और दवा उपलब्धता पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई पेटेंट वाली दवाओं की कीमतें अब भी बहुत ज्यादा हैं. उनके मुताबिक मरीजों को राहत देने के लिए इन दवाओं की कीमतों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
मरीजों के लिए इसका क्या मतलब है?
कैंसर विशेषज्ञों के मुताबिक हर महीने दवाओं पर होने वाले खर्च में कुछ हजार रुपए की कमी भी परिवारों के लिए अहम हो सकती है. लेकिन कम कीमत के साथ दवाओं की लगातार उपलब्धता और सही इलाज तक पहुंच भी जरूरी है. विशेषज्ञों ने जेनेरिक दवाओं और बायोसिमिलर का इस्तेमाल जहां उपयुक्त हो वहां बढ़ाने तथा मरीज सहायता कार्यक्रमों को मजबूत करने की जरूरत बताई है. NPPA की सूची 27 अक्टूबर तक कंपनियों से मिली जानकारी पर आधारित है इसलिए 9 नवंबर को नई कीमतें लागू होने से पहले आंकड़ों में बदलाव संभव है।

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