लखनऊ
लखनऊ में स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने आवास पर प्रेसवार्ता की। उन्होंने कहा, जिस कानून को एससी, एसटी और ओबीसी के हित में बताया गया। उसी कानून की पैरवी में सरकार सुप्रीम कोर्ट में क्यों गायब दिखी। अगर नीयत साफ थी, तो अदालत में मजबूती क्यों नहीं दिखी?
अगर कानून सही था तो सीनियर वकील क्यों नहीं उतारे गए? क्या जानबूझकर कमजोर पैरवी कराई गई ताकि कानून रुक जाए और सरकार दोनों तरफ से बच जाए? जब विश्वविद्यालयों में 90–95% भर्तियां जनरल की हो रही हैं, तो सामाजिक न्याय कहां हैं? क्या ये वही नीति है। 'सांप भी मर जाए, लाठी भी न टूटे' क्या भाजपा एससी, एसटी, ओबीसी और सर्वसमाज को आमने-सामने खड़ा कर राजनीतिक फायदा लेना चाहती है।

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