सागर/ बीना
गर्मी का मौसम आते ही क्षेत्र के कुछ गांवों में जल संकट गहराने लगता है। इसके बाद भी प्रशासन द्वारा पूर्व से तैयारियां नहीं की जाती हैं और ग्रामीण पानी के लिए भटकते हैं। इस वर्ष भी पिछले माह एसडीएम ने बैठक लेकर जल संकट से निपटने के लिए तैयारी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभी तक कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। पीएचई के अनुसार बीना का जलस्तर 34 मीटर नीचे खिसक गया है।
जानकारी के अनुसार ब्लॉक में गिरोल, हडक़ल जैन, उमरिया, जुगपुरा, सलिता में जल संकट गहराने लगा है। यहां जलस्तर गिरने से हैंडपंप, कुआं सूख गए हैं, जिससे ग्रामीणों को खेतों से पानी लाना पड़ रहा है। कई जगह ग्रामीण डेढ़ से दो किलोमीटर दूर से पानी लाने मजबूर हैं। गिरोल गांव के सरपंच हरगोविंद सिंह ने बताया कि गांव में पांच हैंडपंप हैं, जो सूख गए हैं और लोग खेतों से पानी लाने मजबूर हैं। जल संकट को लेकर कलेक्टर, एसडीएम से भी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन पानी का परिवहन शुरू नहीं हुआ है। यदि जल्द व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले समय में पानी की समस्या विकराल रूप धारण कर लेगी। इसी तरह अन्य चार गांवों में भी पानी के लिए ग्रामीण भटक रहे हैं। यह पांच गांव वह हैं, जो अधिकारियों ने चिंहित किए हैं, इसके अलावा कई गांव हैं, जहां पानी की समस्या गर्मियों में होती है।
जल जीवन मिशन का कार्य अधूरा
जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पाइप लाइन डालने सहित टंकी निर्माण का कार्य किया जा रहा है, लेकिन अभी योजना चालू नहीं हो पाई है और अगले साल गर्मियों तक योजना के चालू होने की बात कही जा रही है।
पीएचई की नलजल योजनाएं अधूरी
ब्लॉक में पीएचई की 36 नलजल योजनाएं हैं, जिसमें 19 ही हैंडओवर हो पाई हैं। शेष में कार्य चल रहा है और अधिकारी जून माह तक इन योजनाओं के चालू होने की बात कह रहे हैं। यदि यह योजनाएं समय पर चालू हो जाती, तो ग्रामीणों को राहत मिलती।
तत्काल सुधार रहे हैं हैंडपंप
हैंडपंप बंद होने की सूचना मिलने पर तत्काल सुधार कराया जा रहा है। ज्यादा जलस्तर गिरने पर हैंडपंप में मोटर पंप डालकर पानी सप्लाई करते हैं। शेष रह गईं योजनाओं का कार्य तेजी से चल रहा है, जो जून माह तक पूरा हो जाएगा। -राहुल आरमो, एसडीओ, पीएचई, खुरई
परिवहन के नहीं हैं आदेश
ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के परिवहन के आदेश कलेक्टर से नहीं आए हैं। पंचायतों से जनसहयोग के साथ पानी की व्यवस्था बनाने के लिए कहा गया है। साथ ही पीएचई के अधिकारियों से भी बात की गई है।- प्रदीप पाल, सीईओ, जनपद पंचायत, बीना

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