लखनऊ
यूपी की राजधानी लखनऊ में जानकीपुरम में चारागाह-बंजर समेत अन्य सुरक्षित सरकारी जमीनें हड़पने की कोशिश हुई जिसकी कीमत दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है। वर्ष 2021 में तैनात रहे डीडीसी चकबंदी के खुलासे के बाद हाईकोर्ट ने भी हस्तक्षेप किया। अब जिलाधिकारी की ओर से जांच के बाद शासन को पूरे मामले की रिपोर्ट सौंप दी गई है। साथ ही, चकबंदी के पूर्व में तैनात रहे 10 अधिकारियों पर कार्रवाई की संस्तुति भी की गई है जो प्रथम दृष्टया मामले में दोषी पाए गए हैं। इस संबंध में जानकीपुरम थाने में मुकदमा भी दर्ज किया गया है।
भूमाफिया और चकबंदी विभाग के अफसरों व कर्मचारियों की गठजोड़ से छह गांवों में 120 बीघा सरकारी जमीन घोटाला हुआ था। पुलिस और विभागीय जांच में वर्ष 1988 से अबतक की अवधि में तैनात रहे अफसरों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। बिना उनकी मिलीभगत के 2000 हजार करोड़ की बेसकीमती जमीन का घोटाला नहीं हो सकता है। जानकीपुरम पुलिस ने इस समयावधि में चकबंदी विभाग से तैनात रहे अफसरों और कर्मचारियों का ब्योरा मांगा है। जल्द उन्हें नोटिस जारी कर विवेचक सवाल-जवाब करेंगे। जानकीपुरम थाने में दर्ज भूमाफिया के गुर्गों रामेंद्र कुमार, अमित, सुनील कुमार और लईक खां के एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर चकबंदीकर्ता नरेंद्र कुमार ने दर्ज कराई है।
वर्ष 2020 में हाईकोर्ट पहुंचा
विभाग की जांच रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 1988 में देवा रोड, बीकेटी, इंदिरानगर और जानकीपुरम इलाके के छह गांवों में सरकारी जमीनों पर चकबंदी विभाग से फर्जी आदेश एक भूमाफिया के द्वारा बनवाया गया। इसके बाद जमीनों पर कब्जा कर उसका एक बड़ा हिस्सा बेच भी दिया। चकबंदी विभाग के अफसर ने और कर्मचारी भूमाफिया के दावे को सही मानते हुए उसके पक्ष में आदेश करते रहे। सालों यह खेल चलता रहा। इसके बाद भूमाफिया अपने गुर्गों को आगे कर इन जमीनों को खतौनी में दर्ज कराने के लिए वर्ष 2020 में हाईकोर्ट पहुंचा। न्यायालय ने दस्तावेजों का सत्यापन कराया। सत्यापन में कोर्ट को शक हुआ। इसके बाद जिलाधिकारी लखनऊ से उस आदेश को सत्यापित करने का हलफनामा मांगा। जिलाधिकारी ने 2021 में पांच सदस्यीय जांच कमेटी बना दी। कुछ समय तक चली जांच फिर ठंडे बस्ते में चली गई।
धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया
न्यायालय में सुनवाई के दौरान स्टैंडिंग काउंसिल ने 23 जुलाई 2026 को चकबंदी विभाग से जांच कमेटी की रिपोर्ट के बारे में पूछा। जांच में लेट लतीफी देख लिखित रूप से रेवेन्यू बोर्ड के चेयरमैन, चीफ सेक्रेटरी और प्रिंसिपल सेक्रेटरी (न्याय) को भी सूचित किया। इसके बाद पांच अगस्त 2026 को रिपोर्ट चकबंदी आयुक्त को सौंपी गई। रिपोर्ट में भूमाफिया के साथी रामेंद्र कुमार, अमित कुमार, सुनील कुमार और लईक खां का खेल उजागर हुआ। इसके बाद जिलाधिकारी ने आनन फानन में मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए। तहरीर पुलिस उपायुक्त उत्तर अमित कुमार आनंद को भेजी गई। उन्होंने मामले की जांच कराई। इसके बाद सोमवार को आरोपी रामेंद्र कुमार, सुनील, अमित और लईक खां के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी
पुलिस उपायुक्त उत्तरी अमित कुमार आनंद ने बताया कि तहरीर के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इसके अलावा चकबंदी विभाग से उनकी जांच रिपोर्ट मांग कर घोटाले के दौरान तैनात रहे अफसरों और कर्मचारियों की भी जानकारी मांगी गई है। उस अवधि में तैनात रहे कर्मचारियों के बयान दर्ज होंगे। साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

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