नई दिल्ली
बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने कार्यकाल के खत्म होने से दो साल पहले ही शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। वह अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के पूर्व सहयोगी थे। कुछ वक्त पहले ऐसी खबरें आई थीं कि शहाबुद्दीन ने शेख हसीना को फोन किया था। इसको लेकर काफी ज्यादा बवाल मचा था। बता दें कि बांग्लादेश की वर्तमान बीएनपी सरकार के मुखिया तारिक रहमान और शेख हसीना के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। ऐसे में प्रधानमंत्री रहमान को यह बात काफी नागवार गुजरी थी। बता दें कि शेख हसीना ने कुछ दिन पहले ही बांग्लादेश वापसी की बात कही थी।
‘द डेली स्टार’ अखबार के अनुसार, 76 वर्षीय नेता ने अपने इस्तीफे की वजह के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहाकि मैं स्वास्थ्य संबंधी कई दिक्कतों से जूझ रहा हूं। राष्ट्रपति भवन ‘बंगभवन’ के एक प्रवक्ता ने बताया कि शहाबुद्दीन के प्रतिनिधि उनका त्यागपत्र लेकर संसद के लिए निकल चुके हैं। त्यागपत्र संसद के अध्यक्ष हफीजुद्दीन अहमद को सौंपा जाएगा, जो बांग्लादेश के संविधान के अनुसार नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर काम करेंगे।
हसीना सरकार के समय से पद पर थे
प्रवक्ता ने कहाकि जब तक संसद के अध्यक्ष को त्यागपत्र नहीं मिल जाता, मैं इस्तीफे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं कर सकता। साल 1971 के मुक्ति संग्राम में भूमिका निभाने वाले और निचली अदालत के न्यायाधीश रहे शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में पांच साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी। उन्हें देश की पिछली संसद ने सर्वोच्च पद के लिए चुना था और वह एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे, जो जुलाई-अगस्त 2024 में छात्रों के हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद भी अपने संवैधानिक पद पर बने हुए थे। इन विरोध-प्रदर्शनों के बाद हसीना की अवामी लीग सरकार गिर गई थी। हसीना भारत चली गई थीं और पांच अगस्त 2024 से वहीं रह रही हैं।
लंदन में इलाज के दौरान क्या हुआ था
बताया जाता है कि इसी साल मई में राष्ट्रपति शहाबु्द्दीन इलाज के लिए लंदन गए थे। इसी दौरान उन्होंने निर्वासित प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ संपर्क करने की कोशिश की थी। इसके बाद काफी ज्यादा बवाल मचा था। बताया जा रहा है कि यह मामला सामने आने के बाद ही बांग्लादेश के राष्ट्रपति पर दबाव बढ़ने लगा था। गुरुवार को एक बैठक के दौरान उन्होंने पद छोड़ने की बात कही थी। बता दें कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना बांग्लादेश में हुए आंदोलन के बाद से ही देश छोड़ चुकी हैं। वह भारत भारत में रह चुकी हैं। हालांकि उन्होंने हाल ही में कहा था कि वह इसी साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी।
पहले भी हुई थी हटाने की मांग
पांच अगस्त 2024 को हुए राजनीतिक तख्तापलट के बाद भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन में और समेत कई राजनीतिक दलों ने उन्हें पद से हटाने की मांग की थी। हालांकि, उस समय अंतरिम सरकार ने संवैधानिक कारणों का हवाला देते हुए उन्हें नहीं हटाया था और बाद में यह मुद्दा शांत हो गया था।
12 फरवरी को हुए राष्ट्रीय संसदीय चुनावों में बंगलादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की जीत और सरकार गठन के बाद राष्ट्रपति बदलने की चर्चाएं एक बार फिर शुरू हो गई थीं। हालांकि बीएनपी नेताओं ने मार्च में कहा था कि राष्ट्रपति का कार्यकाल बाकी होने के कारण पार्टी के भीतर इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है, लेकिन इसके चार महीने बाद शहाबुद्दीन के इस्तीफे की खबर सामने आ गई।

More Stories
लद्दाख बॉर्डर पर चीन को झटका! LAC पर कम हुई PLA की तैनाती, भारत की पकड़ हुई मजबूत
BRICS समिट खत्म होते ही बदले बांग्लादेश के सुर, PM तारिक रहमान ने भारत से रिश्तों पर दिया बड़ा बयान
लैंडिंग से पहले विमान में आई तकनीकी खराबी, मिसराता एयरपोर्ट पर हादसे से मची हलचल