नई दिल्ली
पहलगाम आतंकी हमले के बाद आरसीबी के पूर्व स्टार श्रीवत्स गोस्वामी ने पाकिस्तान के साथ सभी खेल संबंधों को खत्म करने की मांग की है। उन्होंने पाकिस्तान के साथ खेल संबंधों को बहाल करने की वकालत करने वालों को भी जमकर लताड़ लगाया है। आतंकी हमले से आक्रोशित श्रीवत्स ने कहा कि बेगुनाह भारतीयों की हत्या करना पाकिस्तान का राष्ट्रीय खेल जैसा बन गया है। भारत को इसका जवाब बल्ले या गेंद से नहीं, बल्कि जीरो टॉलरेंस के साथ देनी चाहिए।
श्रीवत्स गोस्वामी ने अपने पोस्ट में लिखा कि जब भारत ने पाकिस्तान में चैंपियंस ट्रॉफी के लिए अपनी टीम भेजने से इनकार किया था तो कुछ लोगों ने यह कहने की हिमाकत की थी कि खेल को राजनीति से ऊपर उठना चाहिए। उन्होंने कहा कि बहुत हुआ। अभी नहीं। कभी नहीं। पाकिस्तान के साथ क्रिकेट न हो।
गोस्वामी ने लिखा, ‘और यही कारण है कि मैं कहता हूं- आप पाकिस्तान के साथ क्रिकेट न खेलें। अभी नहीं। कभी नहीं। जब बीसीसीआई या सरकार ने पाकिस्तान में चैंपियंस ट्रॉफी के लिए भारत को भेजने से इनकार कर दिया, तो कुछ लोगों ने यह कहने का दुस्साहस किया- ओह, लेकिन खेल को राजनीति से ऊपर उठना चाहिए। निर्दोष भारतीयों की हत्या करना पाकिस्तान का राष्ट्रीय खेल लगता है। और अगर वे ऐसे ही खेलते हैं तो अब समय आ गया है कि हम भी उन्हें उसी भाषा में जवाब दें जो वे समझते हैं। बल्ले या गेंद से नहीं। बल्कि दृढ़ता से। गरिमा से। शून्य सहिष्णुता के साथ।’
श्रीवत्स गोस्वामी ने आगे लिखा, 'मैं आक्रोशित हूं। मैं व्यथित हूं। कुछ ही महीने पहले मैं लीजेंड्स लीग के लिए कश्मीर में था। मैं पहलगाम में घूमा। स्थानीय लोगों से मिला। मुझे उनकी आंखों में उम्मीद लौटते देखा था। मुझे लगा था कि आखिरकार शांति लौट रही हैं। और अब…यह रक्तपात। फिर से। यह आपके अंदर कुछ तोड़ रहा है। यह आपको सवाल पूछने के लिए मजबूर करता है कि अभी और कितनी बार हमें चुप रहना पड़ेगा। हमारे लोग मरते रहेंगे और खेल की दुहाई दी जाएगी। अब नहीं। इस बार नहीं।' भारत ने 2012-13 से पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय क्रिकेट नहीं खेला है और बीसीसीआई ने इस साल की शुरुआत में चैंपियंस ट्रॉफी के लिए अपनी टीम को पाकिस्तान भेजने से इनकार कर दिया था।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने बुधवार को पर्यटकों को निशाना बनाया। हमले में 2 विदेशी नागरिकों समेत 26 लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल है। चश्मदीदों का दावा है कि आतंकियों ने लोगों से उनका धर्म पूछा। गैर-मुस्लिम होने की वजह से आतंकियों ने उन्हें गोली मार दी। कुछ चश्मदीदों ने ये भी दावा किया है कि आतंकियों ने लोगों से कलमा पढ़ने को कहा। और तो और, कुछ लोगों के पैंट उतारकर चेक किया कि वे मुस्लिम हैं या नहीं।

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