February 13, 2026

RSS की विचारधारा से प्रभावित हुए अवध ओझा, कहा—अन्य पार्टियों में चिंतन की जगह चापलूसी

नई दिल्ली 
आम आदमी पार्टी छोड़ने के साथ और राजनीति से संन्यास की घोषणा करने वाले मशहूर कोचिंग गुरु अवध ओझा ने भाजपा और दूसरे दलों में एक अंतर बताते हुए कहा है कि जब तक ऐसा है उसे कोई हरा नहीं पाएगा। उन्होंने आरएसएस की तारीफ करते हुए कहा कि उसके विद्वान किसी नेता की जी हुजूरी नहीं करते हैं। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि दूसरी पार्टियों में चिंतक ही चाटुकार हैं।
 
पिछले साल दिसंबर में आम आदमी पार्टी में शामिल हुए अवध ओझा ने ठीक एक साल बाद मंगलवार को आम आदमी पार्टी के साथ ही राजनीति छोड़ने का आधिकारिक ऐलान कर दिया। उन्होंने अरविंद केजरीवाल को महान नेता बताते हुए उन्हें धन्यवाद दिया और कहा कि राजनीति छोड़ने का उनका फैसला व्यक्तिगत है। हालांकि, आप के कुछ नेताओं-कार्यकर्ताओं ने अवध ओझा के इस फैसले पर नाराजगी भी जाहिर की।

इस बीच अवध ओझा ने आरएएसएस को भाजपा का सलाहकार परिवार बताते हुए कहा कि उनके विद्वानों को पद और पैसे का कोई लालच नहीं है। ओझा कहा कि दूसरे दलों में चिंतक चाटुकार हैं और बॉस को भी यही पसंद होता है। उन्होंने कहा, ‘बीजेपी का एक सलाहकार परिवार है-RSS, जिसके विद्वान किसी नेता की जी हुजूरी नहीं करते क्योंकि उन्हें पद और पैसे का कोई लालच नहीं। बाकी पार्टियों में चिंतक ही चाटुकार है, नहीं तो बॉस भगा देंगे। जबतक ये चलेगा बीजेपी को कोई हरा नहीं पाएगा। जय हिंद।’

बाकी दल एक पैर के सहारे: अवध ओझा
कुछ दिन पहले भी अवध ओझा ने भाजपा की सफलता के पीछे आरएसएस को असली वजह बताते हुए कहा था कि राजनीतिक दलों के दो संगठन होने चाहिए, एक जो राजनीति करे और दूसरा सामाजिक काम। उन्होंने एक्स पर लिखा था,'राजनीतिक दलों के पास दो दल अनिवार्य होते हैं, राजनीतिक पार्टी, सामाजिक संगठन। उदाहरण बीजेपी और आरएसएस। दोनों एक दूसरे के क्षेत्र में दखल नहीं करते, बीजेपी पांच साल राजनीति करेगी, आरएसएस समाज से जुड़ा रहेगा और यही उसकी ताकत है। भारत के बाकी दल अपंग है सिर्फ एक पैर के सहारे हैं।'

 

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