वाशिंगटन
नाटो चीफ के बाद अब अमेरिका ने रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले देशों को अब खुली धमकी दी है। अमेरिका के वरिष्ठ सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि अगर भारत, चीन और ब्राजील ने रूस से तेल लेना बंद नहीं किया, तो अमेरिका उनकी अर्थव्यवस्था पर कड़ा प्रहार करेगा। डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% आयात शुल्क (टैरिफ) लगा देंगे।
इससे पहले NATO महासचिव मार्क रूट ने सीधे चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ये देश अब भी रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं तो उन पर 100% सेकेंडरी सैंक्शंस (अमेरिकी टैरिफ) लगाए जाएंगे। उन्होंने बेहद सख्त शब्दों में कहा था “अगर आप चीन के राष्ट्रपति हैं, भारत के प्रधानमंत्री हैं या ब्राज़ील के राष्ट्रपति हैं तो तैयार रहिए। पुतिन पर दबाव डालिए कि वो शांति समझौता करें, नहीं तो भारी कीमत चुकानी होगी।”
ग्राहम की पुतिन को चेतावनी
मार्क रूट की तरह ही धमकाते हुए अमेरिका का कहना है कि भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश रूस से सस्ता तेल खरीदकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन पर हमला जारी रखने में मदद कर रहे हैं। ग्राहम के मुताबिक, रूस अपनी आधी से ज्यादा कमाई कच्चे तेल के निर्यात से ही करता है और इसमें से 80% से ज़्यादा तेल भारत, चीन और ब्राजील को ही जाता है। ग्राहम ने कहा कि पुतिन ने ट्रंप को कमजोर समझकर बहुत बड़ी गलती कर दी है। उन्होंने कहा- “हम यूक्रेन को और हथियार देंगे, ताकि पुतिन को पीछे हटने पर मजबूर किया जा सके। रूस की अर्थव्यवस्था पहले से ही बुरी हालत में है और अब इसे और नुकसान होगा।”
भारत-चीन-ब्राजील के लिए सख्त संदेश
ग्राहम ने साफ कहा कि इन तीनों देशों को अब तय करना होगा कि वे अमेरिका के साथ व्यापार चाहते हैं या रूस का सस्ता तेल। “अगर आप रूस से तेल खरीदते रहेंगे तो यह खून के पैसों जैसा है। आप पुतिन की जंग को जिंदा रख रहे हैं। हम यह बर्दाश्त नहीं करेंगे।” ग्राहम ने ट्रंप की तुलना एक बेहतरीन गोल्फ खिलाड़ी स्कॉटी शेफ़लर से करते हुए कहा- “डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राजनीति के स्कॉटी शेफ़लर हैं और अब वो अपने विरोधियों को सबक सिखाने वाले हैं।”*
यूक्रेन युद्ध से जुड़ा विवाद
2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया था। इसके बाद अमेरिका और यूरोप ने रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए। लेकिन भारत, चीन और ब्राजील ने सस्ता तेल खरीदकर अपनी जरूरतें पूरी करनी जारी रखी हैं। अब अमेरिका चाहता है कि रूस को और कमजोर किया जाए ताकि युद्ध जल्द रुके।

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