जबलपुर
गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) जबलपुर नए वित्त वर्ष 2026-27 के पहले आठ माह में सेना के लिए तीन सौ धनुष तोप का रक्षा उत्पादन लक्ष्य लेकर इस बार कार्य की शुरुआत करने जा रही है। महत्वपूर्ण है कि एक दशक से अधिक समय से धनुष पर कार्य कर रही निर्माणी की बनी तोप ने ऑपरेशन सिंदूर में एकदम सटीक प्रदर्शन किया था। जिसके बाद रक्षा उत्पादन लक्ष्य दोगुना हो गया है।
पिछले साल निर्माणी को 150 तोप का वर्कआर्डर हासिल हुआ था। इस बार रिकार्ड उत्पादन की ओर बढ़ रही निर्माणी के पास एलएफजी भी है, जो 24 इस सत्र में तैयार होगी। जीसीएफ देश की एकमात्र निर्माणी है जहां धनुष तोप का उत्पादन होता है। श्रमिक सूत्रों के अनुसार जीसीएफ को भारतीय सेना से 300 'धनुष' हावित्जर तोपों का एक बड़ा आर्डर मिलने जा रहा है।
बोफोर्स की तुलना में बेहतर
यह 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत निर्मित स्वदेशी तोपें हैं, जो 155 मिमी, 45-कैलिबर क्षमता की हैं और 38-42 किमी तक सटीक मारक क्षमता रखती हैं, जो बोफोर्स की तुलना में बेहतर है। 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी कलपुर्जे के साथ इसे निर्मित किया जाएगा।
यह तोपें ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी और रेगिस्तानी क्षेत्रों में बेहद कारगर हैं और 155 मिमी के सभी गोला-बारूद दाग सकती हैं। इन तोपों ने पोखरण और अन्य फायरिंग रेंज में कड़े परीक्षण सफलतापूर्वक पास किए हैं।
एलएफजी भी जीसीएफ बनाएगी
पिछले साल की तरह इस साल भी जीसीएफ सेना के लिए लाइट फील्ड गन का उत्पादन जारी रखेगी। पिछले वित्त वर्ष में निर्माणी को 18 एलएफजी उत्पादन का लक्ष्य हासिल हुआ था। जो कि इस बार संभावना है कि 24 गन का उत्पादन संभव होगा। क्योंकि सेना ने एक दशक बाद इस हल्की तोप में रुचि दिखाई है। 17-19 किमी की रेंज वाली ये तोपें 2014-15 के बाद निर्माणी में निर्मित होना शुरू हुई थीं।

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