नई दिल्ली
नई दिल्ली की सियासी फिज़ाओं में हलचल तेज है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) एक बार फिर संगठनात्मक बदलाव की दहलीज़ पर खड़ी है। पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही चर्चाओं को अब ठोस दिशा मिलने वाली है, क्योंकि 20 अप्रैल के बाद नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल्ली आवास पर हुई एक महत्वपूर्ण बैठक ने इन कयासों को और हवा दी है। इस मीटिंग में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संगठन महासचिव बी.एल. संतोष जैसे दिग्गज नेता शामिल हुए। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में पार्टी के भविष्य की रणनीति और नेतृत्व में संभावित बदलाव को लेकर गंभीर विचार-विमर्श हुआ।
पांच नाम, एक कुर्सी: किसे मिलेगी कमान?
विश्वसनीय पार्टी सूत्रों के अनुसार, नए अध्यक्ष को लेकर पांच नामों पर चर्चा जोरों पर है – और इस बार पार्टी दक्षिण भारत, विशेषकर कर्नाटक से किसी नेता को कमान सौंपने पर गंभीरता से विचार कर रही है। आइए जानते हैं इस रेस में शामिल नेताओं के बारे में:
1. प्रह्लाद जोशी
केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल रहे धारवाड़ से सांसद जोशी संगठन और संघ दोनों में गहरी पैठ रखते हैं। उनका अनुशासित नेतृत्व और प्रशासनिक अनुभव उन्हें सबसे मजबूत दावेदार बनाता है।
2. बी.एल. संतोष
आरएसएस की पृष्ठभूमि से आए बी.एल. संतोष का नाम संगठन के लिए स्वाभाविक पसंद माना जा रहा है। वह पार्टी और संघ के बीच मजबूत पुल की भूमिका निभाते हैं।
3. सी.टी. रवि
तेजतर्रार और आक्रामक तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले रवि, कर्नाटक में संगठन को मज़बूती देने के लिए जाने जाते हैं। संघ से जुड़ाव और ज़मीनी पकड़ उनकी खास ताकत है।
4. धर्मेंद्र प्रधान
ओडिशा से सांसद और चुनावी रणनीति के माहिर खिलाड़ी प्रधान, लंबे समय से शीर्ष नेतृत्व की रेस में हैं। संगठन को विस्तार देने में उनकी भूमिका हमेशा से अहम रही है।
5. भूपेंद्र यादव
राजस्थान से आने वाले भूपेंद्र यादव का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है। पर्यावरण मंत्री के रूप में उन्होंने प्रशासनिक कार्यकुशलता दिखाई है, और संगठन में उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है।
एक चौंकाने वाला नाम भी चर्चा में…
सबको चौंकाते हुए, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का नाम भी अचानक चर्चा में आया है। यदि प्रधानमंत्री मोदी उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपते हैं, तो यह एक अप्रत्याशित लेकिन बेहद रणनीतिक फैसला हो सकता है। अब सबकी निगाहें 20 अप्रैल के बाद की राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हैं। क्या दक्षिण भारत से नया नेतृत्व उभरेगा? या पीएम मोदी एक बार फिर सबको चौंका देंगे?

More Stories
Umar Abdullah Divorce: 15 साल से अलग रह रहे थे उमर-पायल, सुप्रीम कोर्ट में तलाक पर हुआ समझौता
आज का मौसम: 15 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, यूपी-बिहार में मॉनसून रहेगा मेहरबान
ITR भरने की आखिरी चेतावनी! देरी हुई तो लगेगा ₹5,000 तक का जुर्माना, जानें पूरी डेडलाइन