नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत एक याचिका देखकर भड़क गए। उन्होंने यह तक कह दिया कि याचिकाओं के कानून को भगवान बचाए। इतना ही नहीं उन्होंने याचिकाकर्ता को भी जमकर फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को रद्द कर दिया। साथ ही इसकी वजहें भी गिनाईं हैं।
बार एंड बेंच के अनुसार, CJI सूर्यकांत ने PIL यानी जनहित याचिका को सुनने से मना कर दिया। अदालत ने इसकी वजह याचिका का अस्पष्ट होना बताया है। CJI ने कहा, 'अगर भारत के शीर्ष न्यायालय के सामने याचिकाओं का ऐसा स्तर है, तो भगवान याचिका के कानून को बचाए।'
AI से याचिकाएं लिखने पर भी जताई थी नाराजगी
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने AI से याचिकाएं लिखने की आदत पर चिंता जाहिर की थी। पीठ शिक्षाविद रूप रेखा वर्मा की एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, 'हम यह देखकर परेशान हैं कि कुछ वकीलों ने याचिकाओं का मसौदा तैयार करने के लिए एआई का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। यह बिल्कुल अनुचित है।'
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि उन्हें हाल में 'मर्सी बनाम मैनकाइंड' नाम का एक ऐसा केस मिला जो अस्तित्व में है ही नहीं। प्रधान न्यायाधीश ने ऐसे ही एक मामले का जिक्र किया और कहा कि जस्टिस दीपांकर दत्ता की अदालत में, 'एक नहीं बल्कि ऐसे कई फैसलों का हवाला दिया गया था।'
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि कई बार, जिन फैसलों का जिक्र किया जाता है वे सही होते हैं, लेकिन उन फैसलों के साथ फर्जी उद्धरण जोड़ दिए जाते हैं और इससे उनकी विषयवस्तु का सत्यापन करना बहुत मुश्किल हो जाता है। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, 'इससे न्यायाधीशों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।'
इस बीच, न्यायमूर्ति बागची ने विधिक मसौदा तैयार करने की कला में गिरावट पर दुख जताया और कहा कि कई विशेष अनुमति याचिकाओं में ज्यादातर पिछले फैसलों के लंबे उद्धरण होते हैं, जिनमें कानूनी आधारों की मौलिक जानकारी बहुत कम होती है।

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