नईदिल्ली
सूरज आग उगलेगा, सड़कें पिघलने लगेंगी, आपका अपना घर एक ‘भट्टी’ बन जाएगा…ये कोई डरावनी कहानी नहीं, बल्कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वो ताजा रिसर्च है जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. 2026 की इस सबसे खौफनाक रिपोर्ट के अनुसार, 2050 तक दुनिया की 40% आबादी यानी लगभग 4 अरब लोग ऐसी गर्मी झेलने को मजबूर होगी, जिसे सहना इंसानी शरीर के बस ककी बात नहीं होगी. दिल दहलाने वाली बात ये है कि वैज्ञानिकों ने भारत के लिए भी रेड अलर्ट जारी किया है. बताया गया है कि ऐसी गर्मी आने वाली है कि धरती पानी की तरह उबलने लगेगी.
भारत में क्या होने वाला है?
ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिकों ने भारत के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत, नाइजीरिया और इंडोनेशिया उन देशों में सबसे आगे होंगे जहां गर्मी का सबसे भयानक रूप देखने को मिलेगा. दावा किया जा रहा है कि पारा 45 से 50 डिग्री सेल्सियस को पार करेगा, इंसानों का शरीर अंदरूनी अंगों को ठंडा रखने में नाकाम हो जाएगा. भारत की करोड़ों की आबादी के पास एयर कंडीशनिंग की सुविधा नहीं है. वैज्ञानिकों का दावा है कि आने वाले दशकों में गर्मी से होने वाली मौतों का आंकड़ा सुनामी की तरह बढ़ेगा.
2010 में केवल 1.5 अरब लोग इस खतरे में थे, लेकिन 2050 तक यह संख्या दोगुनी से भी ज्यादा होकर 3.8 अरब पहुंच जाएगी. हम एक ऐसे ग्रह की ओर बढ़ रहे हैं जिसकी पहचान सिर्फ ‘आग और धुआं’ होगी.
गैस चेंबर बन जाएंगे ये देश
अगर आपको लगता है कि रूस, कनाडा या फिनलैंड जैसे ठंडे देश सुरक्षित हैं, तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं. इन देशों के घर गर्मी सोखने और सर्दी से बचाने के लिए बनाए गए हैं. जैसे ही तापमान बढ़ेगा, ये घर ‘गैस चैंबर’ में तब्दील हो जाएंगे. यहां का ट्रांसपोर्ट और स्वास्थ्य ढांचा भीषण गर्मी के लिए तैयार ही नहीं है.
ऑक्सफोर्ड की रिसर्चर राधिका खोसला ने चेतावनी दी है कि 1.5 डिग्री की सीमा पार होते ही शिक्षा, स्वास्थ्य और खेती सब कुछ तबाह हो जाएगा. खाने का संकट आएगा, फसलें या तो जल जाएंगी या सूख जाएंगी और भूखमरी फैल जाएगी. करोड़ों लोग रहने लायक जगहों की तलाश में घर छोड़ेंगे.

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