जगदलपुर
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में लंबे समय से सक्रिय 25 लाख रुपए के इनामी नक्सली चैतू उर्फ श्याम दादा ने जवानों के सामने सरेंडर कर दिया। श्याम दादा के सरेंडर से नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है। चैतू उर्फ दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य था। उसके ऊपर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसके साथ 9 अन्य माओवादियों ने भी हथियार डाल दिए। इन सभी पर कुल 65 लाख रुपए का इनाम घोषित था।
चैतू को 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले का मुख्य मास्टरमाइंड माना जाता है। उस हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई बड़े नेता मारे गए थे। लंबे समय तक वह दरभा डिवीजन का प्रभारी भी रहा। चैतू उर्फ श्याम दादा वर्तमान में DKSZCM कैडर का है। बस्तर के जंगलों में कई बार सुरक्षाबलों की गोलियों से बच निकला था। बस्तर इलाके में फोर्स की बढ़ते दबदबे के बाद चैतू ने अपने साथियों के साथ सरेंडर करने का फैसला किया। वह करीब 45 साल तक नक्सली संगठन से जुड़ा रहा।
जानिए चैतू दादा के बारे में
चैतू उर्फ श्याम दादा मूल रूप से तेलंगाना का रहने वाला है। वह 1980 में कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही नक्सल संगठन में शामिल हो गया था। नक्सली संगठन में शामिल होने के बाद वह शुरुआत में हिंसात्मक गतिविधियों में शामिल था। उसके बाद 1990 में वह बस्तर इलाके में आकर संगठन के विस्तार के काम में लग गया। इस दौरान इस इलाके में वह करीब 35 साल तक काम किया। उसका मुख्य काम नक्सली संगठन में युवाओं को जोड़ना और भर्ती करना था। सुरक्षाबल के जवानों ने उसे कई बार घेर लिया था लेकिन हर बार वह बचकर निकल जाता था।
क्यों किया सरेंडर
जवानों के सामने सरेंडर करने पहुंचे चैतू ने मीडिया को बताया कि रूपेश और सोनू दादा ने भी हथियार डाल दिए हैं। नक्सल संगठन में अब कुछ नहीं रखा है। मैं करीब 63 साल हूं लेकिन वर्तमान में परिस्थितियों बदल गई हैं। बदली हुई परिस्थति को देखने के बाद ही मैंने अपने साथियों और हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।
झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड
चैतू उर्फ श्याम दादा उन नक्सलियों में शामिल है जिन्होंने झीरम घाटी हमले की योजना बनाई थी। 25 मई 2013 में दरभा घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमला करवाने में इसका हाथ था। इस हमले में विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल समेत कई करीब 24 नेताओं को का एनकाउंटर किया था।

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