नई दिल्ली
रूस और यूक्रेन के बीच काफी लंबे समय से संघर्ष जारी है, जो खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में हमास और इजरायल के बीच शांति समझौता करा दिया। अब उनकी कोशिशें रूस और यूक्रेन के लिए शुरू हो गई हैं। ट्रंप ने रूस के साथ मिलकर यूक्रेन में युद्ध खत्म करने के लिए 28 प्वाइंट्स में ड्राफ्ट तैयार किया है। गाजा के लिए ट्रंप ने 20 सूत्रीय प्लान तैयार किया था। वहीं, यूक्रेन के लिए 28 सूत्रीय पीस प्लान तैयार किया गया है। ट्रंप के इस 28 सूत्रीय पीस प्लान पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की की प्रतिक्रिया भी आ गई है। एक तरफ यूक्रेन के अधिकारियों ने ट्रंप के इस ड्राफ्ट को बेतुका, अस्वीकार्य और अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है। वहीं, जेलेंस्की ने भी कहा कि वह रूस के साथ जंग खत्म करने के लिए अमेरिका के 'विजन' पर उनके साथ काम करने को तैयार हैं।
प्लान के अनुसार कीव पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क इलाके के उन बड़े इलाकों को छोड़ देगा, जिन पर अभी भी उसका कंट्रोल है। इसके अलावा, वह अपने सैनिकों की संख्या कम करेगा। इसके अलावा, इस प्लान में जो सबसे अहम बात कही गई, वो यह है कि यूक्रेन नाटो में शामिल न होने का वादा करेगा। हालांकि, इसके लिए जेलेंस्की पहले ही मना कर चुके हैं। ऐसे में अब देखना है कि क्या ट्रंप के इस 28 सूत्रीय समझौते को यूक्रेन मानता है या नहीं। पीस प्लान के अनुसार यूक्रेन के क्रीमिया, लुहांस्क और डोनेट्स्क इलाकों को असल में रूस का हिस्सा माना जाएगा। इसमें अपनी मिलिट्री की संख्या को लिमिट करने और समय के साथ मॉस्को पर लगे बैन हटाने का भी प्रस्ताव है। यूक्रेन को 100 दिनों में चुनाव कराने होंगे और नाटो मेंबरशिप की कोई भी उम्मीद छोड़नी होगी।
यूक्रेन को अमेरिका की सिक्योरिटी गारंटी मिलेगी। हालांकि, इसके लिए वॉशिंगटन को पैसे देने होंगे। अमेरिका को यूक्रेन को फिर से बनाने और वहां इन्वेस्ट करने के लिए मुनाफे का 50 फीसदी भी मिलेगा और बैन हटने के बाद रूस के साथ इकोनॉमिक पार्टनरशिप भी करेगा। जेलेंस्की के ऑफिस ने एक बयान में कहा कि यूक्रेन को ऑफिशियली वॉशिंगटन से एक ड्राफ्ट प्लान मिला है, जिसके बारे में अमेरिका की तरफ से माना जा रहा है कि इससे डिप्लोमेसी को फिर से मजबूत करने में मदद मिल सकती है। अमेरिका और रूस के दूतों का बनाया 28 पॉइंट का पीस प्लान गाजा सीजफायर पर आधारित है। इसका मकसद यूक्रेन पर रूस के बड़े पैमाने पर हमले को खत्म करना है। पीस प्लान में क्रेमलिन की जानी-मानी रियायतों की मांगों को बताया गया है, जिससे कीव ने बार-बार इनकार किया है। इन्हीं मांगों की वजह से दोनों देशों के बीच अब तक जंग जारी है।

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