भोपाल
शिक्षक सम्मान समारोह में नगर निगम अध्यक्ष माननीय श्री किशन सूर्यवंशी जी ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु का स्थान सर्वोपरि है। गुरु ही वह शक्ति हैं जो केवल छात्र के भविष्य का ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के निर्माण का कार्य करते हैं।
उन्होंने कहा कि “शास्त्रों में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान बताया गया है। भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण जैसे अवतारों ने भी आश्रमों में शिक्षा ग्रहण की। इससे सिद्ध होता है कि चाहे सामान्य विद्यार्थी हों या ईश्वर के अवतार, सबके जीवन में गुरु की भूमिका अनिवार्य है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा 2047 तक विकसित भारत का जो सपना देखा गया है, उसमें शिक्षकों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्त और जिम्मेदार नागरिक गढ़ने वाला होता है।”
श्री सूर्यवंशी जी ने कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा ने सदैव दुनिया को मार्गदर्शन दिया है। नालंदा विश्वविद्यालय जैसे ज्ञान-केंद्रों को नष्ट इसलिए किया गया क्योंकि दुनिया को भय था कि भारत ज्ञान के बल पर विश्व नेतृत्व करेगा। आज भारत पुनः ‘विश्वगुरु’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
गणेश उत्सव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि गणेश जी ने अपने माता-पिता की परिक्रमा कर यह संदेश दिया कि माता-पिता ही संपूर्ण संसार हैं। यह शिक्षा आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है।
अपने उद्बोधन के अंत में उन्होंने कहा कि शिक्षक का सम्मान करना सूर्य को दीप दिखाने के समान है। शिक्षक के भीतर उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम जैसे गुण होते हैं और यही गुण राष्ट्र निर्माण का आधार बनते हैं। इस अवसर पर कार्यक्रम में चांसलर आदरणीय श्री वी.एस. यादव जी, सम्माननीय शिक्षकगण और गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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