इंदौर
इंदौर नगर निगम के द्वारा शहरभर से कचरा समेटने के लिए 900 से ज्यादा गाड़ियों का संचालन किया जाता है, जिनमें से कई पुरानी डीजल गाड़ियां हैं। इन गाड़ियों पर हर माह करीब 4 करोड़ रुपये का डीजल खर्च होता है। हाल ही में नगर निगम ने सीएनजी गाड़ियां भी खरीदी थीं, लेकिन इनकी लागत भी अपेक्षाओं के मुताबिक नहीं रही। इसके चलते अब नगर निगम ने बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीदारी की योजना बनाई है।
बार बार खराब हो रही डीजल गाड़ियां
नगर निगम द्वारा शहर के 85 वार्डों में कचरा उठाने के लिए रोज़ाना बड़ी संख्या में हल्ला गाड़ियां दौड़ाई जाती हैं। इसके साथ-साथ बड़े वाहनों के जरिए बल्क में कचरा भी उठाया जाता है। हालांकि, इनमें से अधिकांश पुरानी डीजल गाड़ियां बार-बार खराब हो जाती हैं, जिससे निगम को अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ता है।
सीएनजी गाड़ियों के रिजल्ट भी अच्छे नहीं रहे
सीएनजी गाड़ियां खरीदी जाने के बाद भी खर्च कम नहीं हुआ और इनकी कार्यक्षमता भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। इसी कारण निगम ने एक माह पहले 100 इलेक्ट्रिक हल्ला गाड़ियां खरीदी थीं, जिनका संचालन अब विभिन्न वार्डों में कचरा उठाने के लिए किया जा रहा है। इन इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कार्यक्षमता बेहतर रही है और अब इन्हें धीरे-धीरे डीजल गाड़ियों की जगह दी जा रही है। इसके साथ-साथ इन गाड़ियों के लिए चार्जिंग स्टेशन और वर्कशॉप विभाग में तैयार किए जा रहे हैं।
4 करोड़ रुपए का खर्च डीजल और सीएनजी पर आ रहा
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि हर महीने 4 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च डीजल और सीएनजी पर आता है, जिसे कम करने के लिए अब सौ और इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदी जाएंगी। इन नई गाड़ियों के लिए प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं और पुरानी खटारा गाड़ियों को नीलाम करने की भी योजना है।

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