October 21, 2026

Crude Oil Price: महंगे तेल से बढ़ेगी महंगाई? 2027 के लिए Goldman Sachs का बड़ा अनुमान

नई दिल्ली

इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें आज 20 अक्टूबर को एक बार फिर 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं. सुबह 8 बजे ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि अमेरिकी कच्चे तेल WTI की कीमत 103.64 डॉलर प्रति बैरल रही है. कारोबार की शुरुआत में तेल की कीमतों में गिरावट थी, लेकिन बाद में इनमें तेजी देखने को मिली. मिडिल ईस्ट में हमलों की खबरों और रूस से तेल की सप्लाई को लेकर अमेरिकी फैसले में अनिश्चितता ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। 

कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल भारत के लिए अहम है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है. तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है. इसका असर महंगाई, परिवहन खर्च और कंपनियों की लागत पर भी पड़ सकता है. ऐसे में निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि तेल की कीमतें 110 डॉलर के पार टिकती हैं या फिर इनमें गिरावट आती है. अगर कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो भारतीय शेयर बाजार में तेजी की रफ्तार पर भी असर पड़ सकता है। 

रूस पर अमेरिका के फैसले से क्यों बढ़ी उलझन?
कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित करने वाला एक बड़ा मुद्दा रूस से जुड़ा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार रात एक आदेश जारी किया था, जिसमें रूस से जुड़े कुछ प्रतिबंधों और शुल्कों में राहत देने की बात कही गई. इसमें रूसी सामान पर लगने वाले शुल्क और रूसी तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर लगाए जाने वाले जुर्माने जैसे कदम शामिल थे। 

हालांकि, ट्रंप ने शनिवार को स्पष्ट किया कि इस मामले में अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि स्थिति का आकलन करने के लिए और समय चाहिए. ऐसे में बाजार यह समझने की कोशिश कर रहा है कि रूस से तेल की सप्लाई पर आगे क्या असर पड़ेगा. अगर रूसी तेल की उपलब्धता बढ़ती है, तो कीमतों को राहत मिल सकती है. वहीं, अनिश्चितता बनी रहने पर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। 

सऊदी अरब और यमन में हमलों से सप्लाई का खतरा
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने भी तेल बाजार की चिंता बढ़ाई है. यमन के हूती समूह ने सोमवार को सऊदी अरब में ऊर्जा प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया. बताए गए ठिकानों में यानबू में अरामको का एक केंद्र, शायबाह ऑयलफील्ड और रियाद का किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शामिल हैं। 

हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने इन दावों की तत्काल पुष्टि नहीं की और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि भी नहीं हो सकी. इसी बीच यमन के शाबवा प्रांत में सुरक्षा बलों के एक ट्रेनिंग कैंप पर हमले में 58 लोगों की मौत और 200 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर सामने आई. इन घटनाओं से क्षेत्र में अस्थिरता और तेल की सप्लाई बाधित होने का डर बढ़ा है. इसी वजह से अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। 

गोल्डमैन सैक्स की तेल पर रिपोर्ट
Goldman Sachs Research के मुताबिक, अगले एक साल में कच्चे तेल की कीमतों में धीरे-धीरे गिरावट आ सकती है. इसकी मुख्य वजह मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई में धीरे-धीरे सुधार होना है. हालांकि, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव अगर दोबारा बढ़ता है, तो तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं. इससे दुनियाभर के बाजारों पर दबाव पड़ने की आशंका है. Goldman Sachs के ग्लोबल कमोडिटी रिसर्च के को-हेड और ऑयल रिसर्च प्रमुख डान स्ट्रूयवेन के अनुसार, दिसंबर 2026 में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 90 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है. इससे पहले बैंक ने इसके 85 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया था। 

Goldman Sachs ने साल 2027 के लिए ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान जताया है. रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई में सुधार होने पर बाजार में उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे कीमतों में नरमी आ सकती है. हालांकि, क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने का रिस्क बना रहेगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल की सप्लाई में बदलाव के बावजूद जियो-पॉलिटिकल टेंशन कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं. ऐसे में आने वाले महीनों में कच्चे तेल की चाल काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि मिडिल ईस्ट में हालात कितने स्थिर होते हैं और तेल की सप्लाई कितनी तेजी से सामान्य होती है। 

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