October 19, 2026

UP में जमीन के रिकॉर्ड हुए डिजिटल, 65 लाख से ज्यादा वरासत ऑनलाइन दर्ज; 98% भू-नक्शे खतौनी से जुड़े

सपा सरकार में 6 साल के रोस्टर पर निर्भर थी खतौनी, योगी सरकार में 99.86 प्रतिशत रियल टाइम व्यवस्था पूरी

65 लाख से अधिक वरासत ऑनलाइन दर्ज, भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने में बड़ी पहल

85 प्रतिशत से अधिक गाटों में अंश निर्धारण, 98 प्रतिशत भू नक्शे खतौनी से जुड़े

ऑफलाइन प्रक्रियाओं से आगे बढ़कर पारदर्शी और तकनीक आधारित राजस्व सेवाओं पर दिया जोर

लखनऊ, 
 उत्तर प्रदेश में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में योगी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सपा सरकार में वर्ष 2017 से पहले जहां खतौनी का निर्माण छह वर्ष के रोस्टर के अनुसार होता था, वहीं अब प्रदेश में रियल टाइम खतौनी व्यवस्था लागू हो चुकी है। इस व्यवस्था का 99.86 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। ऑनलाइन वरासत, डिजिटल भू नक्शे और अंश निर्धारण जैसे कार्यों में भी बड़े स्तर पर प्रगति दर्ज की गई है।

सपा सरकार के समय राजस्व विभाग की कई महत्वपूर्ण सेवाएं ऑफलाइन प्रक्रियाओं पर निर्भर थीं। वरासत दर्ज कराने के लिए लोगों को पारंपरिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जबकि खसरा निर्माण भी ऑफलाइन होता था। भूमि अभिलेखों में बदलाव और उनके अद्यतन के लिए निर्धारित प्रक्रिया के कारण नागरिकों को समय और श्रम खर्च करना पड़ता था। भू-नक्शों की ऑनलाइन उपलब्धता का भी अभाव था। योगी सरकार ने इन व्यवस्थाओं को बदलते हुए राजस्व सेवाओं के डिजिटलीकरण को प्राथमिकता दी है।

खतौनी में तकनीक, रिकॉर्ड में पारदर्शिता
राजस्व विभाग के मुताबिक रियल टाइम खतौनी व्यवस्था के साथ क्यूआर कोड और डिजिटल हस्ताक्षर युक्त खतौनी तैयार करने की पहल की गई है। इससे दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच और भूमि संबंधी रिकॉर्ड के सत्यापन को आसान बनाने में मदद मिल सकती है। छह वर्ष के रोस्टर पर निर्भर पुरानी व्यवस्था की तुलना में यह बदलाव भूमि अभिलेखों को अधिक नया (अपडेट) रखने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

वरासत के लिए ऑनलाइन सुविधा
भूमि स्वामी की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारियों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है। राजस्व विभाग के मुताबिक अब तक 65 लाख से अधिक वरासत ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं। पहले यह प्रक्रिया ऑफलाइन थी और इसमें लंबा व अनिश्चित समय लगने की शिकायतें रहती थीं।

नक्शे और जमीन के हिस्से का रिकॉर्ड भी हुआ बेहतर
भूमि संबंधी रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने के लिए अंश निर्धारण में तेजी लाई गई है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक 85 प्रतिशत से अधिक गाटों में अंश निर्धारण का कार्य पूरा किया जा चुका है। उपलब्ध भू नक्शों और शजरों (विस्तृत भू नक्शों) का 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण हो चुका है। वहीं 98 प्रतिशत भू नक्शों को खतौनी से लिंक किया जा चुका है। इससे जमीन के रिकॉर्ड और नक्शे के बीच डिजिटल संबंध स्थापित करने में मदद मिली है।

वहीं, वर्ष 2021 से ई-खसरा पड़ताल ऐप के माध्यम से डिजिटल खसरा तैयार करने का कार्य भी किया जा रहा है। इससे खेतों से संबंधित विवरण को डिजिटल रूप में दर्ज करने की व्यवस्था विकसित हुई है।

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