October 17, 2026

प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता, फॉगिंग और स्वास्थ्य सेवाओं को युद्धस्तर पर जारी रखने के मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उच्चस्तरीय बैठक में राजधानी को जलभराव से बचाने का बड़ा रोडमैप तैयार

गोमती के बैकफ्लो को रोकने के लिए लगेंगे 12 नए फ्लड पंपिंग स्टेशन, न्याय विहार से एल्डिको ड्रेन तक बिछेगा जल निकासी का नेटवर्क

सीएचसी के रूप में उच्चीकृत होंगे जलभराव प्रभावित क्षेत्र के भी पीएचसी, 132 केवीए का नया सब स्टेशन बनेगा

लखनऊ
लखनऊ के फैजुल्लागंज में इस वर्ष अतिवृष्टि के कारण हुए जलभराव जैसी समस्या भविष्य में न हो, इसके लिए राज्य सरकार ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। शनिवार को रक्षामंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वपूर्ण बैठक में यह तय हुआ कि आईआईएम रोड से पक्कापुल तक गोमती नदी के बाएं तट पर लगभग 5.5 किलोमीटर लंबे तटबंध का निर्माण कराया जाएगा। यही नहीं, गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने पर नालों से पानी की निकासी बाधित होने की समस्या के समाधान के लिए 12 नए पंपिंग स्टेशन भी स्थापित किए जाएंगे और न्याय विहार से एल्डिको ड्रेन तक जल निकासी का विस्तृत नेटवर्क तैयार किया जाएगा।

सिंचाई, नगर विकास, आवास, स्वास्थ्य, राजस्व और ऊर्जा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री और रक्षामंत्री ने बाढ़ एवं जलभराव प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति, राहत एवं बचाव कार्यों तथा समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रस्तावित परियोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, स्थानीय विधायक डॉ. नीरज बोरा और महापौर सुषमा खर्कवाल भी उपस्थित रहीं। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन द्वारा अब तक किए गए राहत प्रयासों के लिए आभार भी जताया।

बैठक में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लखनऊ में भविष्य के दृष्टिगत पेयजल की उपलब्धता का आकलन करते हुए आवश्यक प्रबंध करने की जरूरत बताई। विधायक नीरज बोरा ने फैजुल्लागंज क्षेत्र के प्रभावित परिवारों की समस्याओं से अवगत कराते हुए सीवरेज व्यवस्था को दुरुस्त करने, एसटीपी की आवश्यकता और ट्रांसफार्मरों के सुधार की जरूरत पर बल दिया। महापौर सुषमा खर्कवाल ने बताया कि क्षेत्र में लगभग 6,500 घर प्रभावित हुए हैं और नगर निगम प्रशासन प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद पहुंचाने के लिए 24×7 तत्पर है।
बैठक में फैजुल्लागंज सहित गोमती नदी के आसपास के निचले क्षेत्रों में जलभराव की समस्या, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचाव के लिए तटबंध निर्माण, नालों के विकास तथा आधुनिक पंपिंग व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने में कोई कमी न रहे। स्वच्छ पेयजल, भोजन, चिकित्सा, स्वच्छता और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था निरंतर बनाए रखी जाए। जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध कार्ययोजना पर काम करें। मुख्यमंत्री ने जलभराव के कारण क्षतिग्रस्त हुई सड़कों के तत्काल सुदृढ़ीकरण के लिए भी निर्देश दिए।

केंद्रीय रक्षामंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ के नागरिकों को इस समस्या से स्थायी मुक्ति दिलाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पिछले दो सप्ताह में बाढ़ और जलभराव से फैजुल्लागंज सहित निचले इलाकों के हजारों परिवारों को भारी परेशानी उठानी पड़ी है और उनके घरों व प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आईआईएम रोड से खदरा होते हुए पक्कापुल (हार्डिंग ब्रिज) तक बंधा निर्माण के कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता पर शीघ्र शुरू कराने के साथ ही, इन कॉलोनियों में ट्रंक ड्रेनेज, सीवेज नेटवर्क, घर-घर नल से जल, सड़क और सुदृढ़ विद्युत व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं का समयबद्ध विकास सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली के बुनियादी ढांचे का होगा कायाकल्प
मुख्यमंत्री ने रक्षामंत्री द्वारा रखे गए बिंदुओं पर त्वरित कार्यवाही के निर्देश देते हुए कहा कि आपदा की इस घड़ी में सरकार हर प्रभावित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। क्षेत्र के समग्र विकास पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि फैजुल्लागंज में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शीघ्र ही प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं कक्षा तक के एक नए समन्वित शैक्षणिक संस्थान की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही, उन्होंने क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए जलभराव प्रभावित क्षेत्र के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के रूप में उच्चीकृत करने तथा निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 33 केवीए के स्थान पर 132 केवीए का नया सब-स्टेशन स्थापित करने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ जैसे तेजी से विकसित हो रहे महानगर में जल निकासी की व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि तटबंध निर्माण, पंपिंग स्टेशनों और नालों की योजना एक-दूसरे के पूरक के रूप में तैयार की जाए, ताकि नदी का जलस्तर बढ़ने अथवा अत्यधिक वर्षा होने की स्थिति में भी बस्तियों के भीतर पानी न रुके। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गोमती नदी लखनऊ की आत्मा है, इसके अविरल और निर्मल प्रवाह के लिए जो कुछ भी जरूरी हो, वह कार्यवाही आगे बढ़ाई जाए। उन्होंने नदी में ड्रेजिंग (गाद निकालने) की कार्यवाही को भी तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत बताई।

38 हजार से अधिक आबादी हुई प्रभावित, युद्धस्तर पर चला राहत अभियान
बैठक में बीते दिनों आई बाढ़ की वर्तमान स्थिति और राहत कार्यों की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों ने बताया कि गोमती नदी का सामान्य जलस्तर 105.70 मीटर और चेतावनी स्तर 108.50 मीटर है, जबकि आठ अक्टूबर को जलस्तर 108.60 मीटर तक पहुंच गया था। फैजुल्लागंज का भू-स्तर नदी के सामान्य स्तर से चार मीटर नीचे होने के कारण 8.05 वर्ग किमी क्षेत्र के 21 मोहल्लों में रहने वाले करीब 6,500 परिवार (38 हजार से अधिक आबादी) प्रभावित हुए। प्रशासन द्वारा त्वरित कदम उठाते हुए 16 बाढ़ राहत चौकियां और आठ आश्रय स्थल बनाए गए। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की 32वीं वाहिनी की मदद से 106 नावों, 40 मोटरबोट और 19 स्टीमर के जरिए बचाव कार्य चलाया गया। प्रभावितों के बीच 11,275 राहत खाद्य किट, 67,800 लंच पैकेट और 1,18,500 लीटर पेयजल वितरित किया गया।

स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के मोर्चे पर 28 डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ से युक्त 46 मेडिकल टीमों ने घर-घर भ्रमण कर 8,591 मरीजों का उपचार किया तथा 12,291 मेडिसिन किट, 12,000 ओआरएस पैकेट और 8,591 क्लोरीन टैबलेट बांटीं। आपात स्थिति के लिए 14 एंबुलेंस और दो पशु चिकित्सा शिविर भी लगाए गए। संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए 11 ड्रोन, 172 बैकपैक मशीन, पांच स्वीपिंग मशीन और आठ ट्रैक्टर टैंकरों से एंटी-लार्वा छिड़काव तथा 11 टाटा एस माउंटेड और 23 हैंड-हेल्ड मशीनों से फॉगिंग कराई जा रही है। क्षेत्र में 75 वाटर टैंकर, 36 मोबाइल शौचालय, 179 प्रकाश बिंदु और 135 मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट के साथ ही शिकायतों के निस्तारण के लिए 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम (टोल फ्री नंबर 1077) और छह कंट्रोल प्वाइंट संचालित किए जा रहे हैं।

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