मुंबई
इसमें दो राय नहीं कि टीम इंडिया के मिस्टर सुनामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने भारत के लिए बहुत ही सुनामी पारियां खेली हैं. वह इस फॉर्मेट में दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाज थे, लेकिन प्रदर्शन में निरंतरता गायब रही, तो अब वह नंबर-3 पर जा पहुंचे हैं. और शुरू होने जा रही अफगानिस्तान सीरीज को लेकर उन्हें लेकर बड़ा सवाल है, लेकिन उधर पूर्व दिग्गज सुरेश रैना ने सुझाव दिया है कि उन्हें टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहिए. मतलब व्हाइट-बॉल में तो हालात खराब हो चले हैं, शैली टेस्ट को सुहाती नहीं, ऐसे में फिर यह सुझाव बड़ा अजीब सा लगता है।
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी दमदार नहीं
अभिषेक शर्मा ने अभी तक समग्र रूप से खेले 206 टी20 मैचों में 32.40 के औसत से 5995 रन बनाए हैं, लेकिन उन्होंनेअपना आखिरी प्रथम श्रेणी (फर्स्ट क्लास) मैच 2024 में खेला था. और वह अभी तक खेले सिर्फ 24 प्रथम श्रेणी मैचों में एक शतक और पांच अर्धशतक और 30.60 के औसत से 1071 रन ही बना सके हैं. अमृतसर का यह लड़का पिछले 18 महीनों से लाल गेंद (रेड बॉल) के क्रिकेट से दूर रहा है। भारत के पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना का मानना है कि शर्मा को टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहिए और टेस्ट क्रिकेट के लिए भी ऐसी प्रतिभाओं को निखारने में कोच कैसे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
रैना की यह कैसी सलाह?
यू-ट्यूब चैनल पर आकाश चोपड़ा के शो में रैना ने एक सवाल के जवाब में कहा, 'मांग बदल गई है. मुझे लगता है कि अब यह उतना प्रासंगिक नहीं रह गया है. यह अब बीत चुका है क्योंकि अब अलग-अलग टीमें बनाई जा रही हैं. वनडे को ही देखिए. टीम इंडिया के पास इतने प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं. वे दो टीमें बना सकते हैं, वे हर प्रारूप में अलग हो सकते हैं. लेकिन यही भविष्य है.' उन्होंने कहा, 'मुझे ऐसा इसलिए लगता है, क्योंकि खिलाड़ियों को भी उसी तरह ट्रेनिंग करनी चाहिए. अगर आप एक प्रारूप में हैं तो आप कितना त्याग करते हैं? क्या यह पीढ़ी टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए तैयार है? अगर आप उनसे सवाल पूछेंगे, तो वे कहेंगे 'हां, हम खेलेंगे', लेकिन दिल के गहराई में कोई संभावना नहीं है. क्योंकि इसके लिए कड़ी मेहनत की जरूरत होती है.' रैना बोले, 'मुझे लगता है कि अभिषेक को टेस्ट खेलना चाहिए. वैभव सूर्यवंशी युवा हैं. क्या वे खेलना चाहते हैं? यह एक बड़ा सवाल है. सवाल यह है कि कोच किस तरह की मेंटरशिप (मार्गदर्शन) दे रहे हैं? मानव सुथार अच्छा कर रहे हैं. क्या वह अगले रवींद्र जडेजा बन सकते हैं? क्या वह तीनों प्रारूपों में खेलने के लिए तैयार हैं?
अभिषेक के सामने बड़ा सवाल?
इस साल अभिषेक का बल्ला बोला कम है, खामोश ज्यादा रहा है. और आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं. अभिषेक ने इस साल से लेकर अभी तक 23 मैचों की इतनी ही पारियों में सिर्फ 23.36 के औसक से 514 रन बनाए हैं. इनमें 5 अर्द्धशतक शामिल हैं, लेकिन अब एक जगह के लिए उनकी रेस वैभव सूर्यवंशी से हो चली है. और यह भी देखने की बात होगी कि भारतीय प्रबंधन अफगानिस्तान के खिलाफ कौन सी जोड़ी चुनता है? यह जोड़ी वैभव-अभिषेक होगी ? या फिर सैमसन और वैभव? और सवाल यहीं ही खत्म नहीं होता. सवाल यह भी बड़ा है कि अगर वह पारी शुरू करते भी हैं, तो वह अपने प्रदर्शन के सूखे को खत्म कर पाएंगे?

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