इंदौर
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में नकल प्रकरणों की जांच अब नई व्यवस्था के जरिए की जाएगी। परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों से जब्त किए गए मोबाइल महीनों तक बंद पड़े रहने से उनकी बैटरी डिस्चार्ज हो जाती हैं।
ऐसे में अनुचित संसाधनों की जांच समिति के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह रहती है कि मोबाइल में यह पता नहीं चल पाता कि विद्यार्थी ने परीक्षा के दौरान कितने प्रश्नों के उत्तर फोन देखकर लिखे थे। इससे नकल प्रकरणों पर उचित निर्णय लेने में देरी होती है। अब इस समस्या से निपटने के लिए विश्वविद्यालय अलग से मोबाइल जांच समिति बनाएगा।
कार्यपरिषद ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। विश्वविद्यालय में सालभर स्नातक और स्नातकोत्तर की 780 से अधिक वार्षिक और सेमेस्टर परीक्षाएं होती हैं। इनमें औसतन 250 से 300 नकल प्रकरण सामने आते हैं। कई मामलों में विद्यार्थियों के पास गाइड, पाठ्यपुस्तक या अन्य सामग्री के पन्ने मिलते हैं। इन पन्नों के आधार पर यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि परीक्षा में किस तरह नकल की गई। इसलिए ऐसे मामलों में निर्णय लेना अपेक्षाकृत आसान होता है।
फोन में क्या देखा, कितने सवालों के जवाब मिले
सबसे ज्यादा परेशानी मोबाइल से जुड़े मामलों में आती है। परीक्षा केंद्र से जब्त मोबाइल विश्वविद्यालय में जांच होने तक लंबे समय तक बंद रखे जाते हैं। इस दौरान बैटरी खत्म हो जाती है। मोबाइल चालू नहीं होने पर समिति यह देख नहीं पाती कि विद्यार्थी ने फोन में क्या देखा और उससे कितने सवालों के जवाब लिखे।
कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई ने बताया कि परीक्षा में मोबाइल लेकर आना ही नियमों के खिलाफ है। इसके बावजूद यदि प्रश्नपत्र हल करते समय किसी विद्यार्थी के पास मोबाइल मिलता है तो उड़नदस्ता या केंद्राध्यक्ष नकल प्रकरण बनाता है। इसी को देखते हुए नई समिति बनाई जा रही है। नई समिति का काम सिर्फ जब्त मोबाइल की तुरंत जांच कर नकल से जुड़े तथ्य जुटाना होगा। इससे प्रकरणों की जांच में तेजी आएगी।

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