नई दिल्ली
भारतीय पुरुष क्वाड्रेंट टीम ने थाईलैंड में आयोजित किंग्स कप सेपक टकराव चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया है। एशियन गेम्स 2026 से पहले टीम इंडिया के लिए जीत आत्मविश्वास बढ़ा सकती है। ये खेल काफी दिलचस्प है क्योंकि इसमें फुटबॉल और वॉलीबॉल जैसे अन्य खेलों का मिश्रण देखने को मिलता है।
भारत ने सेमीफाइनल में मेजबान थाईलैंड का सामना किया। तीन सेट के रोमांचक मुकाबले में भारत 15-9, 9-15, 9-15 से हार गया। हालांकि हार हुई, लेकिन टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया और पोडियम पर जगह बनाई। इस कांस्य पदक ने सोशल मीडिया पर चर्चा छेड़ दी है। सेपक टकराव की लोकप्रियता बढ़ रही है, इसलिए टीम के खेल और पदक समारोह के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।
सेपक टकराव क्या है?
सेपक टकराव वॉलीबॉल, फुटबॉल और मार्शल आर्ट का मिश्रण है। खिलाड़ी गेंद को हवा में रखने और नेट के पार भेजने के लिए सिर, घुटने, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन हाथों का इस्तेमाल मना है। मैदान बैडमिंटन जैसा होता है, जबकि खेल का तरीका वॉलीबॉल से मिलता-जुलता है।
किंग्स कप का इतिहास
किंग्स कप सेपक टकराव चैंपियनशिप इस खेल की बड़ी प्रतियोगिताओं में से एक है। यह थाईलैंड के राजा को समर्पित है और 1985 में शुरू हुई थी। पहले विजेता मलेशिया थे। उसके बाद से थाईलैंड इस टूर्नामेंट में सबसे आगे रहा है।
भारत ने हाल ही में हासिल की सफलताएं
यह जीत भारत के लिए और एक अच्छी खबर है। इससे पहले जापान के नागोया में हुए एशिया सेपक टकराव चैंपियनशिप 2026 में भारत ने पुरुष क्वाड्रेंट में स्वर्ण पदक जीता था। फाइनल में जापान को 15-10, 12-15, 15-12 से हराया गया। ग्रुप बी में मलेशिया और दक्षिण कोरिया को पीछे छोड़कर टीम आगे बढ़ी थी और सेमीफाइनल में थाईलैंड को भी हराया था।
मार्च 2025 में भारत ने इंटरनेशनल सेपक टकराव फेडरेशन वर्ल्ड कप में पुरुष रेगू इवेंट में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता था। किंग्स कप का यह कांस्य पदक पुरुष क्वाड्रेंट टीम को और मजबूत बनाता है। अब एशियाई खेल 2026 में भारत की मेडल की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

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