वित्त आयोग की धनराशि के उपयोग पर सरकार सख्त, निगरानी व्यवस्था हुई मजबूत

लखनऊ 
लखनऊ उत्तर प्रदेश के क्षेत्र पंचायतों में केंद्रीय और राज्य वित्त आयोग से मिलने वाली धनराशि के पारदर्शी और नियमानुसार उपयोग को लेकर शासन ने निगरानी व्यवस्था सख्त कर दी है। इसलिए निगरानी में कोई लापरवाही न हो। ब्लॉकों में योजनाओं की निगरानी में लापरवाही करने वाले अधिकारियों को चेतावनी दी गई है। प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने बुधवार को सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर एक सितंबर 2009 के शासनादेश का कड़ाई से पालन कराने को कहा है।

प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने अपने पत्र में लिखा है कि शासन के संज्ञान में आया है कि कई जिलों में क्षेत्र पंचायतों से जुड़े कार्यों और पंचायती राज विभाग की योजनाओं संबंधी व्यवस्था का प्रभावी ढंग से पालन नहीं हो रहा है। यह लापरवाही है। इससे केंद्रीय वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग से मिलने वाली धनराशि का उपयोग निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं हो पा रहा है।

जरूरी कागजात मुख्य कार्यपालक अधिकारी को उपलब्ध कराना होगा
ऐसे में व्यवस्था के तहत क्षेत्र पंचायत स्तर पर खंड विकास अधिकारी या मुख्य कार्यपालक अधिकारी के अधीन सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) सभी कार्यों का संचालन करेंगे। वहीं, जिला पंचायत राज अधिकारी को भी क्षेत्र पंचायतों के कार्यों और विभाग की वित्तपोषित योजनाओं के निरीक्षण एवं निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। निरीक्षण के दौरान जरूरी कागजात मुख्य कार्यपालक अधिकारी को उपलब्ध कराना होगा ।

जनगणना कर्मियों को 31 तक मानदेय का भुगतान
वहीं जनगणना निदेशालय ने सभी जिला अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि 31 जुलाई तक जनगणना में लगे कर्मचारियों का भुगतान कर दिया जाए। जनगणना निदेशक और मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा ने जनगणना कार्य के लिए विभिन्न चरणों की संशोधित टाइमलाइन संबंधी आदेश जारी किए हैं। इसके मुताबिक 31 जुलाई तक जनगणना कर्मियों का भुगतान करना है और 22 अगस्त तक मास्टर ट्रेनर व फील्ड ट्रेनरों का नामांकन किया जाना है।

 

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