गुड़ी पड़वा भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण पर्व में से एक हैं. इसी दिन हिंदू वर्ष की भी शुरुआत होती है. ऐसे में गुड़ी पड़वा का महत्व और भी बढ़ जाता है. यह पर्व देश भर में मनाया जाता है. लेकिन विशेष रूप से महाराष्ट्र और कोंणक क्षेत्र में गुड़ी पड़वा हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है. गुड़ी पड़वा मराठी हिंदुओं के लिए पारंपरिक नए साल का प्रतीक है. गुड़ी पड़वा दो शब्दों से मिलकर बना हैं. जिसमें गुड़ी का अर्थ होता हैं विजय पताका और पड़वा का मतलब प्रतिपदा होता है.
हिंदू पंचांग के अनुसार, गुड़ी पड़वा यानी चैत्र माह शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 29 मार्च को शाम 4 बजकर 27 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन 30 मार्च को दोपहर 12 बजकर 49 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, इस बार गुड़ी पड़वा का पर्व रविवार 30 मार्च को मनाया जाएगा.
गुड़ी पड़वा पूजा विधि
गुड़ी पड़वा की पूजा करने से लिए गुड़ी को अच्छी तरह बांधकर सुगंध, फूल और अगरबत्ती लगाकर दीपक से गुड़ी की पूजा करें. उसके बाद दूध-चीनी, पेड़े का प्रसाद अर्पित करते हैं. इसके बाद दोपहर के समय गुड़ी पर मीठा प्रसाद अर्पित करें. इसके अलावा परंपरा के अनुसार श्रीखंड-पुरी या पूरन पोली का भोग लगाएं. उसके बाद सूर्यास्त के समय हल्दी-कुमकुम, फूल और अक्षत आदि अर्पित कर गुड़ी को उतार लें.

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