लखनऊ
परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के विशेष परिस्थितियों में होने वाले अंतरजनपदीय स्थानांतरण की प्रक्रिया फिलहाल दस्तावेजों की जांच में उलझ गई है। अधिकांश आवेदनों के साथ लगाए गए प्रमाणपत्र स्पष्ट नहीं होने के कारण उन्हें पढ़ने और सत्यापित करने में दिक्कत आ रही है। इसे देखते हुए बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव ने संबंधित जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) से प्रमाणपत्रों की प्रमाणित प्रतियां दोबारा भेजने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही सभी जरूरी जानकारी एक्सेल शीट के माध्यम से भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।विशेष परिस्थितियों में अंतरजनपदीय स्थानांतरण के लिए प्रदेशभर से करीब 7000 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
इनमें शिक्षक दंपती, दिव्यांग, कैंसर से पीड़ित व डायलिसिस करा रहे शिक्षकों के आवेदन शामिल हैं। इन सभी आवेदनों की स्क्रूटनी (जांच) की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कई प्रमाणपत्र अस्पष्ट होने के कारण जांच पूरी करने में समय लग रहा है।
स्थानांतरण प्रक्रिया में देरी होने की संभावना
ऐसे में स्थानांतरण प्रक्रिया में देरी होने की संभावना है। इस बीच परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है। ऐसे में परिषद शिक्षक-छात्र अनुपात (पीटीआर) के आधार पर आवेदन के आधार पर इन शिक्षकों का स्थानांतरण करना चाहती है, ताकि जिन जिलों में शिक्षकों की कमी है वहां संतुलन बनाया जा सके। प्रदेश में 1.11 लाख से अधिक परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें 93.91 लाख विद्यार्थी और 3.03 लाख शिक्षक हैं।
पूरे प्रदेश का औसत पीटीआर 31 है, लेकिन जिलों के बीच इसमें बड़ा अंतर है। इटावा में एक शिक्षक पर औसतन 17 विद्यार्थी हैं। वहीं श्रावस्ती में सबसे अधिक 71 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक है। विद्यार्थियों की संख्या के लिहाज से सीतापुर सबसे बड़ा जिला है, जहां 3.26 लाख विद्यार्थी, 10,275 शिक्षक और 2,970 विद्यालय हैं।
इसके बाद बहराइच में 3.23 लाख और लखीमपुर खीरी में 3.02 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विद्यालयों की संख्या हरदोई में 2,825 और लखीमपुर खीरी में 2700 है। परिषद का प्रयास है कि स्थानांतरण के बाद जिलों के बीच शिक्षक-छात्र अनुपात को अधिक संतुलित बनाया जा सके।

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