कोलकाता
तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बगावत करने वाले सांसदों ने दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए एक बड़ा 'मास्टरस्ट्रोक' चला है। 20 बागी टीएमसी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया है और अब इस पार्टी की कमान पूरी तरह से अपने हाथों में ले ली है। कभी टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाने वालीं और इस बगावत का प्रमुख चेहरा बनीं काकोली घोष दस्तीदार को NCPI का नया अध्यक्ष चुन लिया गया है।
कैसे हुआ यह 'तख्तापलट'?
सूत्रों के मुताबिक, बागी गुट और NCPI के बीच एक आपसी सहमति से यह टेकओवर हुआ है। काकोली घोष की ताजपोशी से ठीक दो दिन पहले NCPI की तत्कालीन अध्यक्ष शेवली कुंडू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 30 मई को चार बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार को आधिकारिक तौर पर इस पार्टी (NCPI) का अध्यक्ष चुन लिया गया।
रविवार को 20 बागी सांसदों के गुट ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और उन्हें इस अनजान पार्टी के साथ अपने विलय की आधिकारिक जानकारी दी, जिसके बाद से यह पार्टी रातों-रात राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गई है।
अभिषेक बनर्जी से नाराजगी बनी बगावत की वजह
टीएमसी के भीतर मचे इस घमासान की असल जड़ ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के अघोषित उत्तराधिकारी अभिषेक बनर्जी को माना जा रहा है। बागी सांसदों का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी का रवैया बेहद 'अहंकारी' है और उन्होंने पार्टी के आंतरिक ढांचे को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है। इसी कथित मनमानी के चलते सांसदों में गुस्सा पनपा, जो अंततः इस बड़ी बगावत में तब्दील हो गया।
बीजेपी नेताओं का मिला परदे के पीछे से साथ
इस पूरे घटनाक्रम में बीजेपी आधिकारिक तौर पर तो कुछ नहीं कह रही है, लेकिन बागी सांसदों को उसका पूरा सहयोग मिला है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और अनुभवी सांसद निशिकांत दुबे ने बागी गुट के साथ लगातार चर्चा कर उनकी आगे की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाई। बागी सांसदों की कई अहम बैठकें सीधे केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर ही हुईं।
NDA में शामिल होने की अपील
रविवार को स्पीकर ओम बिरला को दिए गए विलय के पत्र में इन 20 सांसदों ने खुद को बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA का हिस्सा बताया है। उन्होंने मांग की है कि चूंकि अब तक वे टीएमसी के साथ विपक्ष में बैठते थे, इसलिए अब उन्हें सत्ताधारी गठबंधन (NDA) के साथ सीटें आवंटित की जाएं।
क्या है NCPI (नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया)?
NCPI को जनवरी 2023 में एक राजनीतिक दल के तौर पर मान्यता मिली थी। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में इसका पता पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के सांकराइल का है। यह पार्टी चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड 2000 से अधिक गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) में से एक है। साल 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में इस पार्टी ने 4 उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से एक उम्मीदवार को सबसे ज्यादा महज 536 वोट ही मिल सके थे।
सुदीप बंद्योपाध्याय भी बागियों के साथ
छह बार के सांसद और बागियों में सबसे वरिष्ठ सदस्य सुदीप बंद्योपाध्याय भी कुछ दिन पहले ही इस गुट में शामिल हो गए हैं। उन्होंने यह कदम काकोली घोष के NCPI के 'राजनीतिक मामलों की समिति' द्वारा अध्यक्ष चुने जाने के बाद उठाया।
आगे क्या होगा?
अगर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस विलय को अपनी मंजूरी दे देते हैं, तो यह भारतीय राजनीति का एक बड़ा उलटफेर होगा। कल तक संसद या किसी भी राज्य विधानसभा में एक भी सदस्य न रखने वाली पार्टी NCPI रातों-रात लोकसभा की 5वीं सबसे बड़ी पार्टी और सत्ताधारी NDA का दूसरा सबसे बड़ा दल बन जाएगी।

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