चेन्नई
तमिलनाडु की राजनीति में बड़े उथल-पुथल के आसार हैं। पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा है कि सी जोसेफ विजय की सरकार कभी भी गिर सकती है। साथ ही उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों से चुनाव के लिए तैयार रहने को कहा है। फिलहाल, इसे लेकर TVK यानी तमिलागा वेत्री कझगम की अगुवाई वाले गठबंधन से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इससे पहले द्रमुक विधायक भी दावा कर चुके हैं कि मौजूदा सरकार 6 महीने में गिर जाएगी।
एनडीटीवी के अनुसार, स्टालिन ने अपने जिला सचिवों से कहा है, 'मौजूदा सरकार कभी गिर सकती है।' साथ ही कहा है, 'पार्टी को कभी भी चुनाव के लिए तैयार रहना होगा।' उन्होंने कहा, 'हार अस्थायी है। मौजूदा सरकार कभी भी गिर सकती है। तैयार रहो। इस बात की संभावनाएं हैं कि 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव भी दोबारा हो सकते हैं। हम वापसी करेंगे और दोबारा जीतेंगे।'
DMK को क्या उम्मीद
रिपोर्ट में डीएमके सूत्रों के हवाले से लिखा कि अगर सरकार को समर्थन दे रहे वीसीके, सीपीआई, सीपीएम और आईयूएमएल हाथ खींच लें तो राजनीतिक अस्थिरता आ सकती है। साथ ही कहा कि तमिलनाडु स्पीकर या अदालत AIADMK के बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दें, तो भी ऐसी स्थिति बन सकती है।
सोशल मीडिया के जरिए जीत का दावा
स्टालिन ने सोमवार को आरोप लगाया कि टीवीके ने कोई जमीनी काम नहीं किया, बल्कि लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रभावित कर तमिलनाडु विधानसभा के लिए 23 अप्रैल को हुए चुनाव में जीत हासिल की। स्टालिन ने फिर टीवीके का नाम लिये बिना कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग बच्चों के माध्यम से परिवार के सदस्यों को प्रभावित करने के लिए किया गया और 'यह हमारी नजरों से चूक गया।'
उन्होंने कहा कि द्रमुक को इस बात का अहसास हो गया और अब से वह बहुत सतर्क रहेगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए पार्टी ने सोशल मीडिया आधारित ऐसे प्रयासों को रोकने के लिए योजनाएं बनाई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि 1949 में स्थापित द्रमुक ने कई चुनावी जीत और हार देखी है और पार्टी हमेशा नए सिरे से वापसी करती आई है।
36 सदस्यीय समिति बनाई
खास बात है कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में हार के विश्लेषण के लिए डीएमके 36 सदस्यों की एक समिति बनाई है। स्टालिन ने इस समिति से हार की वजहों पर एक निष्पक्ष और स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने समिति के सदस्यों को शनिवार को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि यह अभ्यास महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि पार्टी की चुनावी गिरावट के मूल कारणों को समझने का एक अहम प्रयास है। इस पैनल को तमिलनाडु के सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों में व्यापक जमीनी अध्ययन करने और कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय पदाधिकारियों से सीधे फीडबैक लेने का काम सौंपा गया है।

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